मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : अधीर की विदाई की तैयारी

झांकी : अधीर की विदाई की तैयारी

अजय भट्टाचार्य

पार्टी की नई नीतियों के कारण वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद गवां सकते हैं। इसकी वजह नव संकल्प शिविर में पार्टी हाईकमान की ओर से तय किए गए नियम हैं। पिछले दिनों उदयपुर में हुए कांग्रेस के ‘नव संकल्प शिविर’ में पार्टी हाईकमान की ओर से तय किया गया है कि पार्टी में कोई भी व्यक्ति अब पांच साल से अधिक समय तक एक पद पर नहीं रह पाएगा। पार्टी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति का भी अनुसरण करेगी। पार्टी में अधीर चौधरी को हटाने की मुहिम शुरू हो गई है। अगले अध्यक्ष के नाम पर पूर्व अध्यक्ष सांसद प्रदीप भट्टाचार्य, पूर्व विधायक देवप्रसाद राय व नेपाल महतो के नामों पर विचार किया जा रहा है।
लखपति गरीब
बिहार विधान परिषद की राजद उम्मीदवार मुन्नी देवी ने टिकट मिलने के बाद बताया था कि उनके पास एक मोबाइल तक नहीं है। लेकिन नामांकन में उन्होंने अपनी संपत्तियों का जो ब्यौरा दिया, उसके मुताबिक मुन्नी देवी १५० ग्राम से ज्यादा सोने और १ किलो चांदी की मालकिन हैं। नामांकन पत्र के अनुसार मुन्नी देवी के पास ८ लाख की चल और १५ लाख की अचल और ३५ हजार रुपए नकदी है। उन पर ६.६ लाख रुपए का ऋण है। उनके पति के पास ५४,७९३ हजार रुपए की संपत्ति है, जबकि उनके बड़े बेटे के पास पति से ज्यादा ५८,४२५ हजार रुपए की संपत्ति है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी में राजद की तरफ से कारी सोहेब, मुन्नी देवी और अशोक पांडेय ने विधान परिषद के लिए नामांकन किया है। नामांकन के साथ ही मुन्नी देवी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि जिस तरह पटक-पटक कर कपड़े धोती हैं, उसी तर्ज पर सांप्रदायिक शक्तियों को पटक-पटक कर धो डालेंगी। इस विधान परिषद के लिए राजद के पास तीनों उम्मीदवार के लिए बहुमत का आंकड़ा नहीं है, पर माना जा रहा है कि माले के समर्थन के बाद तीनों उम्मीदवारों का जीतना तय है।
खिलाड़ी लोधी
भाजपा ने रामपुर में जिन घनश्याम लोधी को लोकसभा उपचुनाव में उतारा है, वे अपने राजनीतिक जीवन में कई राजनीतिक घाटों का पानी पी चुके हैं। भाजपा में कल्याण सिंह के करीबी थे और २००४ में कल्याण सिंह के साथ भाजपा छोड़ दी। २००४ में हुए एमएलसी चुनाव के दौरान कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी और मुलायम सिंह यादव की सपा के गठबंधन के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। २००७ में मायावती मुख्यमंत्री बनीं तब लोधी मौके की नजाकत को देखते हुए बसपा खेमे की तरफ खिसक लिए। उनका कार्यकाल ६ साल का था, फिर भी वह २००९ में एमएलसी रहते हुए बसपा के टिकट पर रामपुर सीट पर लोकसभा का चुनाव लड़े। तब सपा की टिकट पर अभिनेत्री जयाप्रदा ने जीत हासिल की और वे तीसरे नंबर पर रहे। फिर जब २०१६ में एमएलसी के चुनाव हुए और उस समय तक वे बसपा छोड़कर सपा में शामिल हो चुके थे। हालांकि २०२२ के एमएलसी चुनाव से पहले विधानसभा चुनावों के दौरान सपा को छोड़कर अपनी पुरानी पार्टी भाजपा में शामिल हो गए। दिलचस्प यह है कि लोधी ने महज ४ महीने के अंदर ही भाजपा के नामी-गिरामी चेहरों में शुमार और हर दिन स्थानीय जनता के बीच चर्चाओं में रहनेवाले केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और जयाप्रदा जैसे दिग्गजों के नाम पर पार्टी हाईकमान की ओर से विराम लगाते हुए टिकट हासिल कर लिया है।
नोट से विदा होंगे बापू…!
अगर शोर-शराबा नहीं हुआ तो नए नोटों से गांधी जी की विदाई तय है। वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक कथित तौर पर कुछ मूल्यवर्ग के बैंक नोटों की एक नई शृंखला पर रवींद्रनाथ टैगोर और एपीजे अब्दुल कलाम के वॉटरमार्क आंकड़ों का उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं। करेंसी नोटों पर कई अंकों के वॉटरमार्क को शामिल करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। अमेरिका की तरह, डॉलर के विभिन्न मूल्यवर्ग में जॉर्ज वाशिंगटन, बेंजामिन फ्रेंकलिन , थॉमस जेफरसन, एंड्रयू जैक्सन, अलेक्जेंडर हैमिल्टन और अब्राहम लिंकन सहित कुछ फाउंडिंग फादर्स के चित्र हैं। रवींद्रनाथ टैगोर को बंगाल के महानतम प्रतीकों में से एक के रूप में याद किया जाता है जबकि भारत के ११ वें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन के रूप में भी जाना जाता है। नोट पर छपनेवाली तस्वीरों में इन दो महान पुरुषों को जगह देने पर विचार किया जा रहा है।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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