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झांकी : ललन का डोज

अजय भट्टाचार्य।  परदे के पीछे रहकर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने नीतीश कुमार को आगे कर विधानसभाध्यक्ष विजय सिन्हा को डोज दे दिया है। राजनीतिक पंडित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधानसभाध्यक्ष से हुई तकरार के पीछे जदयू के ललन सिंह का दबाव मानते हैं। इसलिए लखीसराय मामले में अधिकारियों को बचा रहे हैं। ललन और विजय सिन्हा के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है क्योंकि लखीसराय ललन सिंह के मुंगेर संसदीय क्षेत्र का ही हिस्सा है। बिहार में सत्तारूढ़ राजग की अंतरकलह के बावजूद भाजपा के विधायक मानते हैं कि सरकार पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं होगा, क्योंकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल नीतीश को लेकर कोई राजनीतिक जोखिम नहीं उठाना चाहता। लेकिन वे खतरे पर ध्यान भी खींचते हैं कि अगर विधानसभा अध्यक्ष के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार कर अधिकारी अपने पद पर जमे रह सकते हैं तो इसका खामियाजा आखिरकार सभी दलों के जन प्रतिनिधियों को उठाना होगा, क्योंकि अधिकारी उनकी बातों को सुनने में इस प्रकरण के बाद कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे।
आईटी रेड की धमकी
सरकारी एजेंसियों के इस्तेमाल पर भाजपा के शीर्ष पुरुष कितना भी झूठ बोलें, मगर सच्चाई सामने आ ही जाती है। बंगाल में भाजपा विधायक कृष्ण कल्याणी सहित चार विधायकों ने आरोप लगाया है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें धमकी दी और कहा है कि उनके घर आयकर (आईटी) की टीम भेजेंगे। कल्याणी ने कहा कि हम चार नए विधायक हैं और विधानसभा की कार्रवाई को समझना चाहते हैं लेकिन जिस तरह से सुवेंदु अधिकारी बार-बार विक्षोभ या प्रदर्शन करके कार्रवाई में खलल डाल रहे हैं, इसका हम चारों ने विरोध किया। इसके बाद ही बाहर निकलकर अधिकारी ने उनके घर आईटी टीम को भेजने की धमकी दी। इन विधायकों ने भाजपा की परिषदीय बैठक में विपक्ष के नेता की भूमिका पर सवाल खड़ा करने का पैâसला किया है और सुवेंदु की जगह किसी अन्य भाजपा नेता को विपक्ष का नेता बनाने की मांग की है।
आग में वीआईपी घी
इधर, भाजपा और जदयू में तलवारें खिंची हुई हैं। उधर, गठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने सात एमएलसी सीटों पर उम्मीदवार उतार कर आग में घी डाल दिया है। स्थायी निकाय कोटे से २४ सीटों पर होनेवाले विधान परिषद चुनाव में मुकेश सहनी ने राजग के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे हैं। सीटों के बंटवारे में ये सभी सात सीटें भाजपा के खाते में आई हैं। वीआईपी ने जदयू के खातेवाली सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं दिए हैं। शेष १७ सीटों पर राजग उम्मीदवारों को वीआईपी समर्थन देगी, इनमें ५ भाजपा कोटे की हैं। राजग में भाजपा १२ व जदयू ११ सीटों पर चुनाव लड़ रही है। एक सीट पशुपति पारस की रालोजपा के लिए है। सहनी ने अपनी पार्टी के लिए भी सीटें मांगी थी लेकिन उनकी मांग को खारिज कर दिया गया। चुनाव ४ अप्रैल को है। इसके अलावा सहनी ने बोचहां विधानसभा सीट पर होनेवाले उपचुनाव के लिए दिवंगत मुसाफिर पासवान के पुत्र अमर पासवान को अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा की, जबकि भाजपा ने इस सीट पर बेबी कुमारी को मैदान में उतारा है। उपचुनाव के लिए २२ को नामांकन होगा। जाहिर है अब भाजपा नेताओं ने मुकेश सहनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा नेता कह रहे हैं कि लालू प्रसाद की विचारधारा वाले व्यक्ति के लिए राजग में कोई जगह नहीं है।
जाखड़ का दर्द
पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी में मचे घमासान के बीच पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ का दर्द बाहर आया है। कहा जाता है कि कांग्रेस आलाकमान जाखड़ को सीएम बनाना चाहते थे, जिसके लिए ज्यादातर विधायक भी सहमत थे। लेकिन अंबिका सोनी ने कह दिया कि पंजाब का सीएम सिख समाज से होना चाहिए, जिसके बाद जाखड़ का पत्ता कट गया। अब जाखड़ ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पार्टी की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने चन्नी को एसेट कहे जाने का भी मजाक उड़ाया है। बकौल जाखड़ चन्नी पार्टी के लिए बोझ हैं और उनके लालच ने पंजाब में पार्टी का नुकसान कराया है। मेरा विचार किसी पर कुछ भी आरोप न लगाने का है। सीडब्ल्यूसी में जिस तरह की चाटुकारिता हुई, उसे देखकर निराशा हुई। रिपोर्ट से पता चलता है कि कुछ नेता जो ३० साल तक राज्यसभा सांसद रहे हैं, सीडब्ल्यूसी में पंजाब की आवाज होने का दावा कर पार्टी आलाकमान को धोखा दे रहे हैं।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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