मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : रणछोड़ नेता...!

झांकी : रणछोड़ नेता…!

अजय भट्टाचार्य।  बंगाल में नवान्न अभियान के दौरान हुई मार-पीट पर भाजपा की पैâक्ट फाइंडिंग कमेटी दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को जब रिपोर्ट दे रही थी, उससे पहले प्रदेश भाजपा के विक्षुब्धों ने नड्डा को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया कि नवान्न अभियान के असल पीड़ितों को केंद्रीय नेतृत्व द्वारा गठित कमेटी के सदस्यों के सामने नहीं लाया गया। टीम को केवल कोलकाता तक ही सीमित रखा गया जबकि पूर्व व पश्चिम मिदनापुर, हुगली, हावड़ा, बर्दवान, बीरभूम, बांकुड़ा व पुरुलिया जिलों से आए जो कार्यकर्ता नवान्न अभियान में घायल हुए थे, उनसे कमेटी के सदस्यों को मिलने नहीं दिया गया। सांतरागाछी देकर रण छोड़ दिया जबकि कार्यकर्ता डटे रहे। प्रदेश सांगठनिक महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती पर भी उन्होंने पत्र में गंभीर आरोप लगाए और उन्हें हटाने की मांग की। नवान्न अभियान के दिन ७५० लोग घायल हुए और ५५० को गिरफ्तार किया गया। ४५ लोग लापता बताए गए हैं।

भावी मुख्यमंत्रियों की फौज
कुछ दिन पहले तक विजय सिन्हा भाजपा में एक मामूली विधायक हुआ करते थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के रूप में जिस तरह मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के साथ उन्होंने पंगे लिए उससे वे मोदी और अमित शाह के खासम खास बन गए हैं। अमित शाह की हालिया बिहार यात्रा में जब शाह ने कहा कि २०२४ लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का एलान करेगी और २०२५ में विधानसभा चुनाव से पहले चेहरे के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी, तभी से सिन्हा को भावी मुख्यमंत्री के सपने आ रहे हैं। मगर शाहनवाज हुसैन का नाम बीच में फच्चर की तरह ठुंसा हुआ है। भावी मुख्यमंत्रियों की सूची में सम्राट चौधरी, गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय भी हैं। नहीं हैं तो सिर्फ सुशील मोदी।

सवाली दहला
बिहार में जदयू और भाजपा के बीच जुबानी जंग जारी है। अमित शाह का जवाब जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने दिया तो सुशील कुमार ने पार्टी की तरफ से मोर्चा खोला, जिसके जवाब में ललन सिंह ने दस सवाल दागकर सवाली दहला उछाल दिया है। ट्विटर पर उन्होंने लिखा-गृहमंत्री अमित शाह ने २०२० के चुनाव में साजिश की थी या नहीं? आईआरसीटीसी आरोप पत्र २०१७ में दायर हुआ था कि नहीं? यदि हां, तो २०२२ तक क्या हुआ? उसका कुछ नहीं हुआ, तो क्या यह साजिश नहीं थी? पूर्णिया हवाई अड्डा बनकर तैयार हुआ है या नहीं? देश के जुमलेबाज गृहमंत्री तो बोल रहे हैं कि बनकर तैयार हो गया है.. भाई बजाओ ताली। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज बिहार सरकार के खजाने से बना जिसका श्रेय जुमलेबाज गृहमंत्री लेना चाहते हैं, क्यों? सुशील जी, आप भागलपुर से एक बार सांसद रहे, किसकी कृपा से जीते थे? हम बताएं या फिर आप खुद बताएंगे? जरा यह भी बताइए कि जदयू से गठबंधन से पहले भाजपा कितनी सीटों पर जीतती थी और गठबंधन के बाद कितनी? बौखलाइए मत २०२४ में पता चल जाएगा, आंसू बहाने लायक भी नहीं रहिएगा। मेरी व्याकुलता मंत्री बनने में नहीं बल्कि पार्टी को बचाने में थी, जिसके खिलाफ आप लोग षड्यंत्र कर रहे थे। मंत्री बनना जिनके जीवन की अंतिम इच्छा थी उनको आप लोगों ने अपने साथ मिलाकर जदयू को खत्म करने का षड्यंत्र किया, क्या यह सत्य नहीं है? २००५ में जब सरकार बन रही थी उस समय उप मुख्यमंत्री बनने की आपकी जो व्याकुलता थी, हम बताएं या फिर आप बताएंगे? चिंता मत कीजिए, २०२४ का चुनाव भाजपामुक्त भारत के नारे से भी जीतकर दिखाएंगे। अगर जानकारी नहीं है तो आरएसएस के अनिल ठाकुर जी से पूछ लीजिए कि २०२० का चुनाव आपके शिष्य कैसे जीते?

राजनीतिक तांडव का तर्पण
देवी पक्ष शुरू होने से पहले और पितृ पक्ष के समापन पर तृणमूल विधायक मदन मित्रा तर्पण करने गंगा घाट पहुंचे, जहां उन्होंने वहां राज्य के विरोधी दल के नेता सुवेंदु अधिकारी और सांसद दिलीप घोष की तस्वीर पर माला पहनाई। मदन दोनों की तस्वीर लेकर तर्पण के लिए बाबू घाट पहुंचे थे। हालांकि मदन ने दोनों के स्वस्थ होने की कामना की। मदन ने कहा वे लंबे समय तक जीवित रहें। उनके परिवार स्वस्थ रहें। लेकिन भाजपा का राजनीतिक रूप से निधन हो गया, उनके पास लोग नहीं होंगे, इसलिए मैंने तर्पण किया। उन्होंने भाजपा के राजनीतिक तांडव का तर्पण किया और कहा कि अगले साल उन्हें पंचायत चुनाव के दौरान लोग नहीं मिलेंगे।

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