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झांकी : आनंद ही आनंद

अजय भट्टाचार्य
नवंबर में एक बाहुबली नेता की बेटी की पटना में हुई भव्य सगाई पर अब चर्चा हो रही है। पार्टी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित बिहार की राजनीति के बड़े-बड़े दिग्गज शामिल हुए थे। इस सगाई समारोह की तस्वीरें सामने आने के बाद ही यह चर्चा होने लगी थी कि बहुत जल्द इस बाहुबली नेता की सजा को माफ किया जा सकता है। परसों गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिहार सरकार कुछ ऐसे कैदियों की सजा को माफ करने जा रही है, जिनका व्यवहार अच्छा है। इस सूची में उस बाहुबली नेता का नाम भी शामिल है, जिसे बिहार सरकार ने छोड़ने का फैसला लिया है। अगर यह सही होता है तो बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन २६ जनवरी को बाहर होंगे। उनका बेटा राजद का विधायक है। आसान भाषा में कहा जाए तो उनकी सजा को माफ किया जा सकता है। बेटी की सगाई हो चुकी है और आने वाले महीने में शादी का आयोजन होना है। पिछले दिनों पैरोल पर आनंद मोहन जेल से बाहर निकले थे। बेटी की शादी अगले महीने में होने वाली है। जबकि विधायक बेटा चेतन आनंद की शादी अप्रैल महीने में आयोजित की जा सकती है। अनंत सिंह को गोपालगंज के पूर्व डीएमजी कृष्ण लीला हत्या मामले में फांसी की सजा दी गई थी। बाद में पटना हाईकोर्ट ने इस सजा को बदलकर उम्रवैâद कर दिया था। पिछले साल १७ मई को आनंद मोहन की उम्रवैâद की सजा समाप्त हो चुकी है बावजूद इसके वे अब तक जेल में बंद हैं।

नीतिश की उलझन
बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पेंच खुल नहीं रहा है। सत्ता के गलियारों में राजद कोटे से बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम सिंह, सुनील सिंह, कांग्रेस से मदन झा, प्रेम चंद मिश्र के नाम संभाव्य मंत्रियों के तौर पर बतकुच्चन का केंद्र बने हैं। अनंत सिंह की पत्नी और सुनील सिंह को लेकर नीतिश कुमार सहज नहीं हैं इसलिए तेजस्वी को समझाने के लिए मंत्री संजय झा के जरिए मनोज झा से बातचीत चल रही है। राजद कोटे से एक भूमिहार और एक राजपूत मंत्री बनना है। सुनील सिंह और नीतिश का रिश्ता ३६ का है जबकि कार्तिकेय सिंह पहले ही बाहर भेजे जा चुके हैं। राजद की तरफ से तीसरा नाम सौरभ कुमार का है मगर अनंत सिंह को नाराज कर तेजस्वी किसी और को मंत्री नहीं बनाना चाहते। ऐसे में विकल्प के तौर पर राजद के पास आनंद मोहन का बेटा चेतन आनंद, रामा सिंह की पत्नी गीता सिंह और सहरसा से विधान परिषद जीत कर आए अजय सिंह हैं। २०२० के विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण के दौरान सुनील सिंह के यहां छापेमारी भी हुई थी। सुनील सिंह के बाद चेतन आनंद सबसे मजबूत दावेदार है क्योंकि जदयू और राजद भी सुधाकर सिंह के साथ हुए व्यवहार के कारण राजपूत मतदाता जिस तरीके से नाराज हैं ऐसे में आनंद मोहन ही हैं जो कुछ हद तक नराजगी कम कर सकते हैं। वैसे मनोज झा चाहते हैं कि अजय सिंह राजपूत कोटा से मंत्री बनें। कांग्रेस मंत्री के दो पद से कम के लिए तैयार नहीं है क्योंकि उन्हें अपने सवर्ण आधार को साधना है। नीतिश के लिए मदन मोहन झा ज्यादा सहज हैं। मिश्रा के बनिस्बत दूसरा नाम अजीत शर्मा का है लेकिन भूमिहार अध्यक्ष हैं ऐसे में इनकी दावेदारी थोड़ी कमजोर पड़ रही है।

चेला काम पर लगा
गुफा वाले तपस्वी का पूर्व आईएएस चेला जब से उत्तर प्रदेश में मंत्री बना है, काम पर लगा है। पिछले सप्ताह गुजरात के उद्योगपतियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए ३८ हजार करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि, पूर्व नौकरशाह से कैबिनेट मंत्री बने चेले के नेतृत्व में, हाल ही में गुजरात में निवेश की तलाश में थे। गुजरात वैâडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के बारे में दिलचस्प बात यह है कि २००३ से २०१३ के दौरान वाइब्रेंट गुजरात के आयोजन में उनकी अहम भूमिका थी, जब वे गुफा तपस्वी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात थे। निवेश आकर्षित करने में उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। गुफा तपस्वी के करीबी माने जाने वाले इस पूर्व नौकरशाह पर उत्तर प्रदेश को विकास के पथ पर ले जाने की जिम्मेदारी है। हर लोकसभा चुनाव में गेम चेंजर साबित हुए उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री कार्यालय और उप्र मुख्यमंत्री कार्यालय कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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