मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : चाह, डाह, आह! वाह वाह

झांकी : चाह, डाह, आह! वाह वाह

  • अजय भट्टाचार्य

चाह, डाह, आह! वाह वाह
बिहार में सत्ता समीकरण बदलने के बाद इन दिनों भाजपा और जदयू के बीच छिड़ा ट्विटर युद्ध विदूषकों के लिए बेहतर हास्य सामग्री उपलब्ध करा रहा है। बिहार के मोदी व राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वर्तमान राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने ट्विटर पर कविता चेंपी, `विडंबना बिहार की… नीतीश कुमार की पीएम बनने की अनंत चाह… ललन सिंह की आरसीपी सिंह से गोतनी जैसी डाह… पैसे और सत्ता के लिए लालू की भूख अथाह… जनता की नहीं कोई परवाह देर-सबेर झेलनी पड़ेगी आह…!’ इसके जवाब में ललन सिंह ने भी जवाबी ट्वीट दागा, `सुशील जी, आपके वक्तव्यों का स्तर उच्चतम है। सच्चाई है कि न तो नीतीश जी की कभी पीएम बनने की चाह, न किसी से मेरी डाह, आपका स्तर आपके ग्रह-नक्षत्र को ठीक कर पुनस्र्थापित करा देगा। मेरी शुभकामना आपके साथ।’ अब इतनी चुटीली तुकबंदी हो रही हो तो वाह वाह तो बनता है न!
दिन के सपने का बूस्टर डोज..!
पिछले सप्ताह भुवनेश्वर में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में अमित शाह ने भविष्यवाणी की कि २०२४ के आम चुनावों में अपनी पार्टी के लिए एक और जीत तथा ओडिशा में भाजपा के सत्ता में आने की भविष्यवाणी की जिसे बीजद ने इसे `दिन का सपना’ करार दिया। वैसे भाजपा ने २०१९ के चुनावों में महत्वाकांक्षी मिशन १२० स्थापित किया था। तब विधानसभा में २२ सीटों पर अपनी स्थिति में सुधार करने में कामयाबी हासिल की। आठ लोकसभा क्षेत्रों में जीत हासिल कर एक बड़ी प्रगति की लेकिन तभी से इसकी चुनावी किस्मत दगा भी दे रही है। भाजपा को पंचायत, नगरपालिका और चारों विधानसभा उपचुनाव में हार मिली। ओडिशा में अपने दम पर खड़ी बीजद ने सीएए, अनुच्छेद ३७०, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा का साथ दिया। ऐसे में पूरी ताकत से उतरकर भाजपा का बीजद को परेशान करना असंभव लगता है। फिलहाल शाह का बयान ओडिशा में उनकी पार्टी के लोगों के लिए बूस्टर डोज है।
जफर हाजिर हो..!
प्रधानसेवक और भाजपा के चहेते जफर सरेशवाला और उनके बेटे हबीब के खिलाफ कलोल की एक अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है। चेक बाउंस मामले में अदालत ने इस बात का संज्ञान लिया कि जफर ने १६ जून को नई मुंबई के थायरोकेयर से एक कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट जमा कर कोर्ट के सामने पेश होने से छूट ली थी। मगर उनके इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला। १७ जुलाई को सरेशवाला ने अमदाबाद के डॉ. एमजी अनारवाला द्वारा एक जुलाई को जारी एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उन्हें सात सप्ताह तक यात्रा या परिश्रम न करने की सलाह पर अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने की छूट दी। लेकिन उस दौरान उन्होंने कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में और समाचार चैनलों पर लाइव बहस में भाग लिया। मतलब पेशी से छूट पाने के उद्देश्य से अदालत के समक्ष एक मनगढ़ंत प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के जरिए जफर के बेटे हबीब के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी करने को कहा। अदालत १८ अगस्त को आगे की सुनवाई करेगी।
स्वतंत्रता दिवस-२
देश १५ अगस्त को आजादी की ७५वीं सालगिरह मना चुका है। प्रधानसेवक के कहने पर भाजपा घर-घर तिरंगा अभियान पूरा कर चुकी है। मोदी जी लाल किले की प्राचीर से भाजपा को छोड़ देश की हर राजनीतिक पार्टी के परिवारवाद पर प्रवचन दे चुके हैं। लेकिन बंगाल के मालदह जिले के रतुआ, दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट तथा उत्तर २४ परगना जिले के बनगांव, नदिया, रानाघाट और कृष्णानगर में हर साल १८ अगस्त को स्वाधीनता दिवस मनाया जाता है। १२ अगस्त १९४७ को वायसराय माउंटबेटन ने १५ अगस्त १९४७ को देश आजाद करने की घोषणा की थी। उस वक्त सीमांकन प्रभारी अधिकारियों ने मालदह और नदिया जिलों के कई हिंदू बहुल गांवों को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को दे दिया था। उन क्षेत्रों में काफी हिंसा हुई थी, जिस कारण आजाद होने का जश्न १५ अगस्त को नहीं मनाया गया। नदिया राज घराने ने मामले को माउंटबेटन तक पहुंचाया। तब माउंटबेटन के निर्देश पर बंगाल के हिंदू इलाकों को हिंदुस्थान और मुस्लिम इलाकों को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किया गया। यह प्रक्रिया १७ अगस्त की रात तक पूरी हुई। इस कारण हिंदुस्थान-बांग्लादेश सीमा के कई गांवों में १५ अगस्त के बजाय १८ अगस्त को स्वाधीनता दिवस मनाया जाता है। इस दिन को ब्रिटिश शासन के साथ ही पूर्वी पाकिस्तान से भी आजादी के तौर पर यहां के लोग मनाते हैं।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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