मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी: दीदी ने फिर चिढ़ाया

झांकी: दीदी ने फिर चिढ़ाया

अजय भट्टाचार्य

दीदी ने फिर चिढ़ाया
दीदी ने एक बार फिर भाजपा को उबलने का मौका दे दिया है। मुकुल राय की अध्यक्षतावाली बंगाल की सार्वजनिक लेखा समिति (पीएसी) समेत विधानसभा की १५ कमेटियों की मियाद एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। इससे संबंधित प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया। इसके अनुसार किसी भी कमेटी के चेयरमैन व सदस्यों को बदला नहीं जा रहा है। अगले एक साल तक यह कमेटी पहले की तरह ही काम करेगी। इन कमेटियों में पीएसी अधिक चर्चा में रही है क्योंकि इसका चेयरमैन अमूमन विपक्ष का कोई सदस्य होता है, जबकि यहां तृणमूल में शामिल हो चुके मुकुल रॉय को चेयरमैन बनाया गया है। मुकुल पिछले साल जून महीने में भाजपा से तृणमूल में शामिल हुए थे। इस वजह से विपक्ष मुकुल को चेयरमैन के पद से हटाने की मांग लेकर कोर्ट तक गया था। हालांकि मुकुल को भाजपा का विधायक ही मान्य किया गया है।

बोलेंगे कि बोलते हैं…!
एक बार फिर मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ‘अग्निवीर’ योजना को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने केंद्र को कहा है कि यह योजना नौजवानों के हित में नहीं है। यह योजना बताती है कि सरकार और गांवों के बीच दूरी बढ़ रही है। साथ ही राज्यपाल ने युवाओं से आग्रह किया कि प्रदर्शन करते वक्त हिंसा न करें। जो मुख्यमंत्री ये वादे कर रहे हैं कि वो नौकरियां देंगे उनका ही भरोसा नहीं कि वो दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं। सेना अधिकारियों द्वारा सरकार का बचाव करने को भी उन्होंने गलत बताया है। वर्दी और न्यायालय की ही इज्जत बची है। वर्दीवाले जनरल को टीवी पर लाना गलत है। कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर उन्होंने कहा कि यह युवाओं की बेइज्जती है। लोग मुझे बोलेंगे कि गवर्नर साहब फिर बोल रहे हैं लेकिन मैं बोलना बंद नहीं करूंगा। मुझे मोदी जी एक बार बोलें मैं गवर्नर पद छोड़ दूंगा। अभी रिटायरमेंट के बाद और बोलूंगा। मैं आपातकाल मैं जेल गया था, तब भी बोलता था और अब भी बोलता हूं। मैं प्रधानमंत्री मोदी से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि इस योजना को वापस लें।

शोभा ओझा का इस्तीफा
आखिर मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा को समझ में आ गया कि सरकार उन्हें काम नहीं करने देगी, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मार्च २०२० में सत्ता परिवर्तन के साथ ही महिला आयोग के पर कतरने की शुरुआत हुई, मगर राज्य के हाईकोर्ट से सरकार को निर्देश दिया कि महिला आयोग की नियुक्तियों के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए। अब इस्तीफा देने के बाद ओझा कह रही हैं कि सरकार ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया। आयोग में सरकार ने अपने आदमी घुसा दिए, जिन्होंने आयोग पर परोक्षत: कब्जा कर लिया। नतीजा यह हुआ कि भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ महिला उत्पीड़न के मामलों में दखल देने से आयोग को रोका गया। मार्च २०२० में महिला उत्पीड़न के लंबित १० हजार मामले बढ़कर अब १७ हजार हो चुके हैं।

भाजपा के खेल में शामिल विपक्ष
गुजरात में विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं का पसंदीदा विरोध यह था कि सत्ताधारी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक संपत्तियों पर भाजपा के पोस्टर लगाने के लिए खुली छूट दी थी। कांग्रेस और ‘तीसरी ताकत’ आम आदमी पार्टी के पोस्टर लगाने में भाजपा में शामिल हो गई है, यह महसूस करते हुए कि उनके शोर-शराबे से कुछ नहीं निकलेगा। पहले कांग्रेस ने ही पूरे अमदाबाद में भाजपा के अलावा अपने पोस्टर और पार्टी चुनाव चिह्न लगाना शुरू किया। अब ‘आप’ की बारी है। सार्वजनिक संपत्तियों को खराब करने की दौड़ अभी शुरू हुई है और गुजरात विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ यह तेज होगी। विपक्ष का मंत्र स्पष्ट लगता है कि यदि ‘आप’ भाजपा को उसके खेल में नहीं हरा सकते हैं, तो खेल में शामिल होना बेहतर है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)

 

अन्य समाचार