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झांकी : ‘घारी’ ने बाजी मारी

  • अजय भट्टाचार्य

‘घारी’ ने बाजी मारी
सूरत की एक खास मिठाई का नाम है घारी। इसमें ढेर सारा मावा, ड्राई फ्रुट्स  और केसर मिलाया जाता है, जिससे मिठाई का स्वाद और भी बढ़ जाता है। यह मिठाई सूरत में अक्सर त्योहार पर बनाई जाती है और यह खाने में लाजवाब होती है। गुजरात की सत्ता के गलियारों में इन दिनों घारी ने बाजी मारी है। गुजरात की राजधानी भले गांधीनगर हो मगर मौजूदा गुजरात सरकार का सत्ता केंद्र सूरत में है। इस क्षेत्र से महत्वपूर्ण विभागों गृह, शहरी विकास, वित्त, सड़क और भवन आदि सहित संभालने वाले कम से कम आधा दर्जन मंत्री हैं। सूरत और नवसारी के कई लोग सत्ता के गलियारों में एक मंत्री के कार्यालय से दूसरे कार्यालय में जाते दिखाई देते हैं। उनका इतना दबदबा है कि वे बिना अनुमति या प्रतीक्षा के मंत्रियों के कार्यालयों में घुस जाते हैं। इन लॉबिस्टों का गांधीनगर में घर है और वे सप्ताहांत पर अपने गृहनगर जाते हैं। पहले जब विजय रूपाणी मुख्यमंत्री थे तब राजकोट लॉबी थी। उनसे पहले यह आनंदीबेन पटेल के शासन के दौरान अमदाबाद लॉबी थी। वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल अमदाबाद से हैं पर चलती सूरत की है। इस पर एक वरिष्ठ नौकरशाह मुस्कुराते हुए कहता है, `घारी इन दिनों काफी लोकप्रिय हैं।’
त्यागी को (भाजपा ने) त्यागा
भारतीय जनता पार्टी की विशेषता यह है कि जब भी पार्टी किसी कार्यकर्ता की करतूत पर फंसती नजर आती है, तुरंत उससे पार्टी के रिश्ते होने से कन्नी काट लेती है। ताजा मामला श्रीकांत त्यागी का है। पार्टी का कहना है कि वह इसके सदस्य नहीं थे। भाजपा की नोएडा इकाई के अध्यक्ष मनोज गुप्ता और गौतम बौद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा व अन्य लोगों ने कहा है कि त्यागी भाजपा का सदस्य नहीं था/है। त्यागी ने खुद को भाजपा के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य और इसकी युवा समिति के राष्ट्रीय समन्वयक बताता रहा है। उसकी पत्नी अनु त्यागी ने दावा किया है कि श्रीकांत त्यागी भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं, लेकिन पिछले सप्ताह एक महिला से उनके विवाद के बाद से पार्टी ने उसे दूध से मक्खी की तरह छोड़ दिया। पिछले शुक्रवार से दो बार पूछताछ के लिए पुलिस द्वारा हिरासत में ली गई अनु ने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण के दौरान उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसके परिवार को परेशान किया गया।
अधूरी समीक्षा
बंगाल में अपनी कमजोर जमीन को मजबूत करने के लिए भाजपा ने लगभग एक महीने पहले बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने के कार्यक्रम चालू कर प्राथमिक स्तर पर देश के ७४ हजार बूथों की पहचान कर वहां पार्टी की हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा कर केंद्रीय  बूथ समीक्षा कमेटी के पास रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया था। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जय पांडा के नेतृत्व में बनी इस कमेटी में प्रदेश भाजपा के सांसद दिलीप घोष भी हैं। हर भाजपा सांसद को अपने क्षेत्र के १०० बूथों व विधायकों को उनके विधानसभा क्षेत्र के २५ बूथों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था। पूरे जुलाई महीने तक चली इस मुहिम में सिर्फ दो सांसदों दिलीप घोष व सुकांत मजूमदार के अलावा कोई भी सांसद १०० हारी हुई बूथों की समीक्षा का काम पूरा नहीं कर सका। पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ९० हारी हुई बूथों का काम पूरा कर पाए। बाकी सांसदों में किसी ने आधा तो किसी ने उससे भी कम काम किया है। घोष ने १०१ बूथों की समीक्षा का काम पूरा किया। कमेटी में बंगाल से घोष के रहने के बावजूद उनके सभी सांसदों ने काम पूरा नहीं किया, इसे लेकर कमेटी नाराज है।
वंशावली पेश
बिहार की नई सरकार में मंत्री बनने के लिए महागठबंधन के विधायक अपना-अपना `वसीला’ लगा रहे हैं। खगड़िया सदर से विधायक छत्रपति यादव ने कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखकर मांग की है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले नए मंत्रिमंडल में उन्हें उनकी जाति के आधार पर जगह दी जाए। उनका तर्क है कि कैबिनेट में उनके शामिल होने से ओबीसी, विशेष रूप से यादवों के बीच एक मजबूत संदेश जाएगा। चूंकि वे बिहार में पार्टी के इकलौते यादव विधायक हैं इसलिए अपनी दावेदारी के साथ उन्होंने पत्र में अपनी वंशावली का भी जिक्र किया है। जिसमें उनके दिवंगत पिता राजेंद्र प्रसाद यादव ने तीन मुख्यमंत्रियों, बिंदेश्वरी दुबे, भागवत झा आजाद और जगन्नाथ मिश्रा की अध्यक्षता वाली कैबिनेट में काम करने का उल्लेख किया गया है। १६ विधायकों वाले वाम दलों ने बाहर से सरकार का समर्थन करने का फैसला  किया। १९ सदस्यीय कांग्रेस को चार मंत्री पद मिलने की उम्मीद है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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