मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : हेमंत की कुर्सी खतरे में !

झांकी : हेमंत की कुर्सी खतरे में !

  • अजय भट्टाचार्य

हेमंत की कुर्सी खतरे में !
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी खतरे में है। चुनाव आयोग ने सोरेन के खिलाफ विधानसभा सदस्यता रद्द करने के मुद्दे पर राज्यपाल को ये रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में क्या है? यह अभी साफ नहीं है लेकिन आयोग का फैसला मानने को राज्यपाल बाध्य हैं। भाजपा ने इसे हितों के टकराव का मामला बताते हुए राज्यपाल से अवैध आवंटन की शिकायत की थी। भाजपा ने इसी साल फरवरी में झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को ज्ञापन सौंपकर यह आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए हेमंत सोरेन ने अपने नाम से रांची के अनगड़ा में पत्थर खनन लीज आवंटित करा ली। परसों प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रांची में कथित तौर पर मुख्यमंत्री के सहयोगी प्रेम प्रकाश के घर से दो एके -४७ राइफलें जब्त कीं थी। ये हथियार अवैध हैं या नहीं, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया लेकिन केंद्रीय एजेंसी ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। सोरेन के राजनीतिक सहयोगी पंकज मिश्रा और मिश्रा के सहयोगी बच्चू यादव लंबे समय से हिरासत में हैं।
आनंद को मनाने की कोशिशें
कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश इकाई की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से आनंद शर्मा के इस्तीफा देने के बाद पार्टी उन्हें मनाने की कोशिश में लगी है। इसलिए पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला की उनसे हुई मुलाकात के परिणाम का इंतजार है। इलाज के लिए विदेश रवाना होने से पहले कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हिमाचल प्रदेश के एआईसीसी प्रभारी राजीव शुक्ला को इस मुद्दे को शांत करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। हिमाचल प्रदेश चुनावों से पहले, आनंद शर्मा ने रविवार को राज्य के लिए पार्टी की संचालन समिति की अध्यक्षता से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कहा कि उनके पास लगातार बहिष्कार और अपमान के बाद कोई विकल्प नहीं बचा था। राजीव शुक्ला ने १० जनपथ आवास पर सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कुछ घंटों के बाद शर्मा से मुलाकात की और इस समस्या को दूर किया। आनंद का कहना है कि विधानसभा चुनाव की रणनीति और योजना के संबंध में किसी भी बैठक में उनसे परामर्श नहीं किया गया था।
घोष अड़े
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष सीबीआई को लेकर दिए गए बयान पर आलाकमान के निशाने पर होने के बावजूद झुकने को तैयार नहीं हैं। खबर है कि हेस्टिंग्स स्थित भाजपा कार्यालय में दिलीप घोष के साथ अमित मालवीय की हुई बातचीत में उनसे सीबीआई के मुद्दे पर पूछा गया और अन्य मुद्दों को लेकर भी चर्चा हुई। तब घोष ने कहा, ‘न्याय नहीं मिलने पर बोल नहीं सकता? सीबीआई किसकी है, यह देखने की आवश्यकता नहीं है। जनता के रुपए से हमारे देश की एक संस्था चल रही है। उन पर मुझे भरोसा है। जब भरोसा नहीं रहता है, उसी समय सवाल उठाता हूं। चुनाव बाद हिंसा में ६० कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। किसी को न्याय मिला? कितने भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों को न्याय मिल पाया है? अगर ये सवाल उठाने पर किसी को खराब लगता है तो लग ही सकता है। हालांकि मैं किसी को खुश करने के लिए राजनीति नहीं कर रहा हूं। मैं बंगाल के आम लोगों के अधिकारों के लिए राजनीति कर रहा हूं, कोर्ट गया था, सीबीआई की मांग की थी। सीबीआई अगर अपना काम ही न करे तो हम बोल भी नहीं सकते हैं?’
क्यों कतरे पर?
गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों राजेंद्र त्रिवेदी और पूर्णेश जोशी से राजस्व और सड़क व भवन विभाग छीने जाने की वजह सामने आ गई है। त्रिवेदी अपने कार्यालय में पूरे दरबार लगाते थे और राज्य भर के लोगों की बात सुनते थे, राजस्व कार्यालयों पर अपने ‘छापे’ और दोषी अधिकारियों को सजा देने के साथ आलाकमान को प्रभावित करने में विफल रहे। मध्य गुजरात में एक बड़े भूमि सौदे में शामिल होने से उनके राजस्व मंत्रालय का नुकसान हुआ। पूर्णेश मोदी ने अपनी मनमानी के कारण आकर्षक सड़क और भवन विभाग खो दिया। वे अधिकारियों को अलग रखकर सीधे ठेकेदारों से डील करते थे था। हाल ही में हटाए गए उनके सचिव ने वापसी की और उनकी ओर से काम किया। इतना कि सचिव अक्सर मंत्री के नाम पर अधिकारियों को धमकाता था। दोनों मंत्रियों के बारे में शिकायतें पीएमओ तक पहुंचीं थी।

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)

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