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झांकी : मुन्नाभाई पीएचडी

  • अजय भट्टाचार्य

मुन्नाभाई पीएचडी
शिक्षक भर्ती घोटाले में जेल भेजे गए पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी पीएचडी में मुन्नाभाई निकले। उन्होंने सिर्फ दो दिन कक्षा में हाजिर रहकर ट्रांसफार्मिंग इंडियन इकोनामी टू नॉलेज इकोनॉमी–द रूल ऑफ ह्यूमन रिसोर्स यूथ रेंफेरेंस ऑफ इंडिया विषय पर पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली। जबकि इसके लिए ७५ प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है और पार्थ वहां सिर्फ दो दिन ही कक्षा में हाजिर रहे। डिग्री उन्हें नियमों का उल्लंघन कर दी गई थी। अब सीबीआई पार्थ चटर्जी की पीएचडी की डिग्री हासिल करने में किसने भूमिका निभाई, इसकी जांच कर रही है। हाल ही में सीबीआई ने उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के कुलपति व एसएससी के पूर्व चेयरमैन सुबीरेश भट्टाचार्य से पूछताछ की थी। कथित तौर पर पार्थ को यह डिग्री दिलाने में उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के एक पूर्व कुलपति और पीएचडी के लिए पूर्व रजिस्ट्रार की भूमिका थी। पार्थ ने २०१२ में पीएचडी के लिए रिसर्च एलिजिबिलिटी टेस्ट दिया था। २०१४ में उनको पीएचडी की डिग्री मिली थी।
झारखंडी बतोले
पिछले पांच दिन से मीडिया झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी हिलाने में ऊर्जा झोंके हुए है मगर अभी तक चुनाव आयोग की अनुशंसा पर मुहर नहीं लगी है। अफवाहों को खबरों में पिरोकर बतोलेबाजी हो रही है। उसी का नतीजा है कि सत्ताधारी दल के विधायकों को मीडिया ने छत्तीसगढ़ पहुंचा दिया जबकि कोई विधायक छत्तीसगढ़ नहीं गया है। विधायकों का कहना था कि हमें कहीं जाने की जरूरत नहीं है। हम लोग झारखंड में राजधानी के आस-पास ही हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में हम लोग तुरंत पहुंच जाएं। पहले पतरातू जाने की योजना बनी थी फिर किसी ने लतरातू डैम जाने का सुझाव दिया। मीडिया का फोकस विधायकों से ज्यादा उनकी कारों में लगेज ढूंढने में था, जिससे कहा जा सके कि वे वाकई ‘बाहर’ जा रहे हैं। बहरहाल अभी तक तो हेमंत सोरेन ही झारखंड के मुख्यमंत्री हैं। अलबत्ता मुख्यमंत्री निवास पर विधायकों की हाजिरी से चर्चा हुई कि बस आ गई है, जिसमें विधायक बैठकर यहां से निकलेंगे लेकिन किसी के पास कोई पुख्ता खबर नहीं। विधायकों के अंदर आने-जाने का सिलसिला जारी रहा।
मोदी गीता में महाभारत
इन दिनों भाजपा के हर छोटे-बड़े नेता को मोदी गीता मतलब मोदी २.० के पठन-पाठन और प्रवचन के काम पर लगाया गया है। बीते शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर कोलकाता आईसीसीआर में मोदीॅ२.० यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल पर सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान ही आईसीसीआर के बाहर दक्षिण कोलकाता में भाजपा के युवा मोर्चा प्रभारी अभिजीत नाहा और सव्यसाची रॉय चौधरी के बीच महाभारत छिड़ा हुआ था, बात हाथापाई तक पहुंच गई। नाहा के अनुसार सव्यसाची पार्थ मामले में शामिल हैं। मार्केट में तृणमूल के नाम पर उगाही करते हैं तो भाजपा की बैठक में क्या कर रहे हैं? सव्यसाची भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का नाम ले रहे थे लेकिन मुझे लगता है कि वह झूठ बोल रहे थे। भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर मैं नहीं चाहता था कि इस तरह का कोई व्यक्ति पार्टी की सांगठनिक बैठक में रहे।’ इधर आईसीसीआर के बाहर अभिजीत नाहा समेत युवा मोर्चा के कई कार्यकर्ता सव्यसाची पर हावी हो गए थे और उनके साथ मारपीट भी की जा रही थी। इस पर सव्यसाची का कहना था कि वह प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य के कहने पर यहां आए हैं। तब शमिक बोले कि सव्यसाची एक वकालतनामे पर मुझसे हस्ताक्षर कराने के लिए आया था। नगर निगम चुनाव से पहले अभिजीत नाहा ने मेरा परिचय सव्यसाची से करवाया था। इसके आगे मैं कुछ नहीं कह सकता।
बिग बॉस देख रहा है
गुजरात में कामकाज की समीक्षा के बाद जिस तरह से विभाग छीनकर दो मंत्रियों के पर कतरे गए उसका साइड इफेक्ट गांधीनगर की नौकरशाही पर महसूस किया जा सकता है। उनके लिए सप्ताहांत की शुरुआत सुस्त रही, लेकिन जल्द ही व्हाट्सऐप समूहों पर आदान-प्रदान की झड़ी लग गई। किसी को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी और ‘अचानक’ कदम ने कई बाबुओं को आश्चर्यचकित कर दिया कि उनकी भी यही गति हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अधिकारियों को भी सावधान रहना होगा। ‘बिग बॉस’ देख रहा है। चुपचाप अपना काम करो।’

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