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झांकी : नमो चाय नी किटली

  • अजय भट्टाचार्य

नमो चाय नी किटली
आज गुजरात दूसरे चरण के लिए मतदान मतदान करेगा। हार-जीत से परे अमदाबाद स्थित मणिनगर में सामने दीवान बल्ली भाई स्कूल के ‘नमो चाय नी किटली (केतली)’ का अलग जलवा कायम है। प्रधानसेवक ने किसी समय चाय पर चर्चा करके लोकप्रियता कमाई, जिससे प्रेरित होकर हिंदू रबारी ने `नमो चाय नी किटली ‘ दुकान शुरू की जो इन चुनावी दिनों में ज्यादा चर्चा में रही। कक्षा ८ तक पढ़े रबारी का दावा है कि वह मणिनगर में भाजपा के एक बड़े नेता के यहां काम करता था। आज उनकी किटली में भाजपा के कई प्रमुख नेता आते हैं और चर्चा करते हैं कि लोगों से बेहतर संपर्क कैसे किया जाए? कभी भूषण भट्ट, गोरधन जडफिया, धर्मेंद्र शाह, महेश कसवाला जैसे नेता अक्सर इस चाय की दुकान पर इकट्ठा होकर एक कप चाय पीते हुए चर्चा में शामिल होते रहे हैं। रबारी हर महीने १५ हजार रुपए कमाते हैं। राजस्थान के मूल निवासी रबारी जाहिर है कि पीएम के प्रशंसक हैं। चाय पे चर्चा की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए नमो चाय की किटली से अच्छा साधन और क्या हो सकता था?
दिसंबर खेला
बंगाल की राजनीति में एक बार फिर राग दिसंबर शुरू हो गया है। परसों डायमंड हार्बर में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि दिसंबर में खेला होगा। पंचायत चुनाव के बाद लड्डू बंटेंगे। मगर बोलते वक्त कुछ ऐसा भी कह गए कि उसके राजनीतिक गूढ़ार्थ समझने की प्रक्रिया जारी है। बोले-जिसे पकड़ता हूं उसे खत्म कर के छोड़ता हूं। जाहिर है कि वे पिछले दो वर्षों से भाजपा से जुड़े हैं। तो क्या तृणमूल को निशाने पर रखकर भाजपा को निपटाने की योजना पर हैं? साथ ही इसी दिसंबर महीने में विजय सम्मेलन मनाए जाने की बात भी कही। इससे एक दिन पहले नैहाटी में भाजपा की एक प्रतिवाद को संबोधित करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजुमदार ने कहा कि जो नेता दिल्ली-दिल्ली किए हुए थे वे आज दिल्ली का लड्डू और नहीं खाना चाहते हैं। दिसंबर की ठंड में यह सरकार कांपेगी। खेला अब दोतरफा होगा। एक पक्ष से खेला में मजा नहीं आता अत: अब दो पक्षों में होगा भयंकर खेला। दूसरी तरफ सुवेंदु के अनुसार पहले नेता कहते थे, कोलकाता चलो। अब पीसी-भाइपो हर बात में कहते हैं कांथी चलो। इसी आतंक का नाम सुवेंदु अधिकारी है। भाजपा के अंत:पुर की खबरें बताती हैं कि यह दिसंबर खेला बंगाल भाजपा का सेल्फ गोल न बन जाए।
डिजिटल रिश्वत
सरकार बहादुर ने फरमाया कि डिजिटल लेन-देन करो। इससे चुनाव सहित हर क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी। इलाहाबाद जो अब प्रयागराज हो गया है, वहां हाई कोर्ट के एक अर्दली ने डिजिटल लेन-देन में पूरी आस्था व्यक्त करते हुए डिजिटल रिश्वत लेना शुरू किया। वकीलों से रिश्वत लेन के लिए उसने पेटीएम क्यूआर कोड को अपनी अदालती ड्रेस में स्थान दिया। अब जिन वकीलों को रिश्वत देना होता, बंदा हाजिर होकर क्यूआर कोड स्कैन करने को कहता इस तरह अपनी रिश्वतखोरी जारी रखे हुए था। पकड़ा गया तब राजेंद्र कुमार नामक इस अर्दली को निलंबित कर दिया गया है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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