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झांकी : नो वैकेंसी

  • अजय भट्टाचार्य

नो नो वैकेंसी
बिहार में एक तरफ जब भाजपा के सभी मोर्चों के कार्यकारणी की बैठक के लिए पार्टी के दो शीर्ष नेता अमित शाह और जेपी नड्डा पटना में थे, तब जदयू और भाजपा की तकरार की तल्खी और बढ़ती नजर आई है। पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह ने आरसीपी सिंह के नाम का नारा लगने पर पलटवार कर दिया है। ललन सिंह के अनुसार गठबंधन में सब कुछ ठीक है। कुछ गड़बड़ नहीं है। जनता दल यूनाइटेड है। इस पार्टी में एक ही सर्वमान्य नेता हैं नीतीश कुमार। यहां मुख्यमंत्री के लिए नो वैकेंसी नहीं है। पार्टी के लिए ये गर्व की बात है कि नीतीश कुमार हमारे नेता और मुख्यमंत्री हैं। आरसीपी सिंह के समर्थन में नारे लगाने के मामले में उन्होंने कहा कि पार्टी की अपनी लाइन है। बिहार की आबादी १५ करोड़ है। ऐसे में १००-२०० लोग क्या बोलते हैं, उसका कोई खास अर्थ नहीं है। वहीं आरसीपी सिंह द्वारा खुद को नालंदा और नीतीश कुमार को बख्तियारपुर का बताने पर ललन सिंह ने कहा कि इन बातों का कोई मतलब नहीं है। इन बातों को छोड़िए।
झारखंड षड्यंत्र के असम लिंक
झारखंड की झामुमो-कांग्रेस सरकार गिराने के षड्यंत्र के तार असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़ रहे हैं। झारखंड के बेरमो निर्वाचन क्षेत्र के कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल सिंह ने पार्टी के ३ विधायकों के खिलाफ शिकायत पत्र लिखा और आरोप लगाया कि तीनों ने उन्हें गुवाहाटी ले जाने और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मिलने के लिए कोलकाता बुलाया था। उन्होंने पत्र में लिखा कि हिमंत बिस्वा सरमा ने कथित तौर पर नई सरकार में प्रति विधायक १० करोड़ रुपए के अलावा एक निश्चित मंत्री पद का आश्वासन दिया, जो वर्तमान झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस सरकार को गिराने के बाद बन सकती है। कुमार जयमंगल सिंह की शिकायत पर पुलिस ने तीनों विधायकों (इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन बिक्सल कोंगारी) के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है। प्राथमिकी हावड़ा स्थानांतरित की जाएगी, जहां तीनों को उनके कब्जे से नकद वसूली के बाद गिरफ्तार किया गया था। इधर, हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि वे पहले कांग्रेस में ही रहे हैं, लिहाजा पार्टी नेताओं से लंबे समय से जुड़ाव के कारण वो आज भी कांग्रेस के कई नेताओं के संपर्क में हैं। कांग्रेस के नेता मेरे संपर्क में हैं क्योंकि मैं उस पार्टी में बीते २० साल से था। वे जब भी असम आते हैं मुझसे मिलते हैं। मैं भी उनसे दिल्ली में मिलता हूं।
मैराथन शुरू, इंतजार खत्म
अगले महीने सितंबर के अंतिम सप्ताह में गुजरात में होनेवाले ३६वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन होना है। गुजरात सरकार चुनावों से पहले बहुत सारे काम निपटाने की जल्दी में है और यह जल्दी इस बात से समझी जा सकती है कि राष्ट्रीय खेलों के प्रतीक चिह्न का अनावरण आनन-फानन में कर दिया गया। यह एक भव्य समारोह था, जिसमें मुख्यमंत्री और खेल मंत्री शामिल हुए थे। सरकार की इस जल्दबाजी से खेल विभाग के अधिकारी बौखला गए हैं। गुजरात के खेल प्राधिकरण ने लोगों के प्रतीक चिह्न के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। निविदा दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि २६ जुलाई थी। लेकिन निविदा बंद होने की तिथि से पहले ही प्रतीक चिह्न का अनावरण कर दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने चुटकी ली, ‘मैराथन शुरू हो गया है और कोई प्रतीक्षा नहीं है।’
गरीब कैश क्वीन
बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में कैश क्वीन बनकर उभरी अर्पिता मुखर्जी के घरों से भले ५० करोड़ से ज्याद नकदी जप्त की गई हो और उसके बैंक खातों में जमा ८ करोड़ रुपयों की निकासी पर रोक लगी हो, इसके बावजूद उसकी गरीबी पर लोगों को हंसी आ रही है। ईडी ने अर्पिता के बेलघरिया टाउन क्लब स्थित दो फ्लैट्स में से एक को सील कर दिया है। एक फ्लैट के आगे सोसाइटी का नोटिस भी चस्पां है। इसमें लिखा गया है कि अर्पिता ने मेंटिनेंस के ११,८१९ रुपए नहीं चुकाए हैं। अब सोचिए करोड़ों की नकदी होने के बावजूद अगर अर्पिता अपने फ्लैट का मेंटिनेंस नहीं चुका सकी तो उससे ज्यादा गरीब और कौन हो सकता है?

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