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झांकी : अहो ज्ञानं…

अजय भट्टाचार्य

अहो ज्ञानं…
‘उष्ट्राणां विवाहेषु, गीतं गायन्ति गर्दभा:।
परस्परं प्रसंसन्ति, अहो रूपं अहो ध्वनि:।।’
अर्थात ऊंटों की शादियों में गधे गाते हैं। वे एक दूसरे की अहो रूप अहो आवाज कहकर प्रशंसा करते हैं। ज्ञान के अभाव में यही होता है। छोटे सुल्तान ने एक प्रकाशन समूह के पुस्तक विमोचन पर ज्ञान मंदाकिनी प्रवाहित की कि ‘अहोम साम्राज्य आसाम में साढ़े छह सौ साल तक चला। बख्तियार खिलजी से लेकर औरंगजेब तक उन्होंने सभी को पराजित भी किया।’ सच यह है कि अहोम वंशी राजाओं ने कुल ५९८ साल (१२२८ से १८२६ तक) असम पर राज किया था साढ़े छह सौ साल नहीं। १२०६ के कामरूप युद्ध में असम के राजा पृथु ने बख्तियार खिलजी को पराजित किया था। पृथु, खेन वंश के राजा थे। १२०६ में ही पश्चिम बंगाल का प्राचीन नगर देवकोट में अली मर्दान खिलजी ने बख्तियार खिलजी की हत्या कर दी थी। अब कोई माननीय से पूछे कि १२२८ के बाद असम की सत्ता संभालने वाले किस अहोम राजा ने बख्तियार खिलजी के भूत से युद्ध किया था?
मोहभंग..!
भाजपा से फुदक  कर तृणमूल में शामिल हुए त्रिपुरा के विधायक आशीष दास का महज ६ महीने में ही पार्टी से मोहभंग हो गया। तृणमूल पर नेताओं को सम्मान नहीं देने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़े तीन सप्ताह बीत गए हैं मगर कहीं से कोई बुलावा नहीं मिल रहा। आशीष ने कालीघाट आकर पवित्र होने के लिए अपना सिर मुंडवाया था तथा आदिगंगा में यह कहते हुए स्नान किया था कि प्रायश्चित करने के लिए उन्होंने ऐसा किया है। अब वे कह रहे हैं कि जब पार्टी ने त्रिपुरा में अपने पैर पसारने शुरू किए थे, तब ८० प्रतिशत लोग तृणमूल के साथ आने के लिए उत्सुक थे। मैं भी पार्टी में शामिल हो गया था लेकिन अब मेरे लिए इस पार्टी में रहना संभव नहीं है। इसलिए, मैंने इस्तीफा दे दिया। जो सोच कर तृणमूल में शामिल हुआ था, वह गलत साबित हुआ। तृणमूल में गुटबाजी अधिक है। यहां मुझे काम करने नहीं दिया गया जबकि काफी उत्साह से मैंने तृणमूल का झंडा थामा था। वैसे यह भी खबर है कि विधानसभा में उन्हें टिकट मिलने की संभावना कम होने के कारण ही उसने तृणमूल छोड़ दिया। अब उनके अगले ठिकाने पर सभी की निगाहें टिकी है।
बंगाल दुर्दशा पर चिंतन
अमित शाह के बाद बंगाल में संगठन का हाल देख भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी ऐसा महसूस होने लगा है कि पश्चिम बंगाल के नेताओं पर भरोसा करने पर और डूबना होगा। बंगाल से लौटने के समय ही नड्डा ने बी.एल. संतोष के साथ बात की। अगले महीने हैदराबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले ही बंगाल के नेताओं के साथ दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व बैठक करेगा। कुछ केंद्रीय नेताओं का मानना है कि मुख्य रूप से राज्य में कुछ प्रदेश नेताओं के एकतरफा निर्णय, पुराने नेताओं व कार्यकर्ताओं से दुव्र्यवहार व अपने करीबियों को प्रमुखता देने के कारण ही बंगाल में पार्टी की दुर्दशा हुई है। इसका उपाय निकालने के लिए अमित शाह, जेपी नड्डा व बीएल संतोष चर्चा कर सकते हैं। इसके बाद बंगाल के प्रदेश नेताओं अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष, सांगठनिक महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती व पर्यवेक्षक अमित मालवीय को तलब किया जा सकता है। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, धर्मेंद्र प्रधान भी रह सकते हैं।
चुप्पी चोर
कहावत है मुंह बंद रखने वाली मछली कभी पकड़ में नहीं आती। भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे और सीबीआई जांच का सामना कर रहे गुजरात के आईएएस कांकीपति राजेश एक बार फिर ट्विटर पर सामने आए हैं। जहां सवाल उठ रहे हैं कि के. राजेश को सीबीआई ने अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? आईएएस अधिकारी ने एक मछली और एक हुक की तस्वीर के साथ ट्वीट किया और इसे कैप्शन दिया: ‘मुंह बंद रखने वाली मछली कभी पकड़ी नहीं जाती’। ट्वीट ने सीबीआई सहित कई लोगों का ध्यान खींचा, जो अभी भी सुरेंद्रनगर में डेरा डाले हुए हैं, जिस जिले में के. राजेश कलेक्टर के रूप में तैनात थे और जहां उन्होंने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया था। कई लोग इस ट्वीट को राजेश द्वारा एक सूक्ष्म संकेत के रूप में पढ़ रहे हैं कि चूंकि उन्होंने चुप्पी साध रखी है, इसलिए वह इससे बच सकते हैं। मगर ट्वीट ने चुप्पी चोर का चरित्र उजागर कर दिया है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)

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