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झांकी : नरेश पटेल की राजनीति से तौबा

अजय भट्टाचार्य

नरेश पटेल की राजनीति से तौबा
जिस नाम के कारण हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से किनारा कर कमल घाट पर धूनी रमा ली, बड़े पाटीदार चेहरे नरेश पटेल ने राजनीति में उतरने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस नरेश पटेल को अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही थी। अब नरेश पटेल का कहना है, ‘मैं राजनीति में नहीं जाऊंगा और खुद को सामाजिक कार्यों में व्यस्त रखूंगा।’ पाटीदार नेता को राजनीति में आने के मुद्दे पर एक सर्वे कराया गया था, जिसमें १०० फीसदी बुजुर्गों ने उन्हें राजनीति में नहीं जाने की सलाह दी। जबकि ८० फीसदी महिलाओं और युवाओं को लगता है कि उन्हें राजनीति में आना चाहिए। गुजरात की ६ करोड़ से अधिक आबादी में पाटीदार समुदाय की करीब १२ फीसदी हिस्सेदारी है। कई विधानसभा क्षेत्रों में पाटीदार समुदाय की आबादी करीब १५ फीसदी है। पिछले विधानसभा चुनाव में पाटीदारों की नाराजगी का फायदा कांग्रेस को हुआ था और पिछले साल स्थानीय निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी को। नरेश पटेल श्री खोडलधाम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख हैं और पाटीदारों में मजबूत पैठ रखते हैं।
ग्रुप से बहिर्गमन
बंगाल भाजपा की अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। अब भाजपा की राज्य कार्यकारिणी कमेटी के सदस्य ने कार्यकारिणी का व्हॉट्सऐप ग्रुप छोड़ दिया है। मोहित राय पार्टी के एक प्रवक्ता होने के साथ ही रिफ्यूजी सेल के चेयरमैन भी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की कोलकाता यात्रा के दौरान दिलीप घोष ने प्रस्ताव दिया था कि २० तारीख को पश्चिम बंग दिवस का पालन किया जाए। हालांकि बाद में प्रदेश भाजपा के सांगठनिक महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती ने उस प्रस्ताव के संबंध में कुछ नहीं कहा। यह बात मोहित राय को ठीक नहीं लगी। राज्य कार्यकारिणी कमेटी के व्हॉट्सऐप ग्रुप में मोहित राय ने इस मुद्दे पर सवाल उठाया, ‘पश्चिम बंग भाजपा क्या पश्चिम बंग दिवस ही नहीं चाहती?’ इसके बाद व्हॉट्सऐप ग्रुप की सेटिंग आईटी सेल की ओर से बदल दी गई, जिस कारण एडमिन के अलावा कोई और उस ग्रुप में कुछ नहीं लिख पाता। इसके बाद मोहित राय ग्रुप से निकल गए और बोले, ‘व्हॉट्सऐप ग्रुप में कोई और मैसेज ही नहीं भेज पाता। फिर मैं ग्रुप में रहकर क्या करता। मैं प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य हूं, ऐसे में किसी ग्रुप के छोड़ने से क्या फर्क पड़ता है।’
नमो घाट
वाराणसी के इस नए घाट का नाम ‘खिड़किया घाट’ है लेकिन इसे ‘नमो घाट’ भी कहा जा रहा है। प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी जल्द ही इस घाट का उद्घाटन कर सकते हैं। नमो घाट पर तीन जोड़ी हाथ की अभिवादन करती आकृतियां बनाई गई हैं। सूर्य का अभिवादन और गंगा को प्रणाम करते हाथों के इन तीनों शिल्पों की वजह से इस घाट को लोग ‘नमो’ घाट कहते हैं। घाट के प्रथम चरण का काम समाप्ति की ओर है। इस घाट से जल मार्ग और वायु मार्ग को भी जोड़ा जाएगा ताकि पर्यटक अन्य शहरों तक जा सकें। काशी के करीब ८४ घाटों की शृंखला में यह नया घाट लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब २१,००० वर्ग मीटर क्षेत्र में बन रहे इस घाट की लागत लगभग ३४ करोड़ रुपए है। यह लगभग आधा किलोमीटर लंबा है और इसके निर्माण में ‘मेक इन इंडिया’ पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस घाट पर ‘वोकल फॉर लोकल’ भी दिखेगा। श्रद्धालु बनारस की सुबह देखने के बाद यहां शाम को गंगा आरती में शामिल हो सकेंगे।
बाय बाय सर!
सोशल मीडिया पर एक इस्तीफा (नौकरी छोड़ने के लिए दी गई चिट्ठी) वायरल हो रहा है। इसके बारे में हजारों लोग बातें कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस इस्तीफा पत्र में तीन शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। नेटीजन इसे ‘सरल और सही बिदु पर’ बता रहे हैं। आमतौर पर इस्तीफा लिखते समय लोग बहुत ज्यादा सोचते हैं। कई लोग कंपनी के बॉस से अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहते हैं क्योंकि हो सकता है कि उन्हें उसी कंपनी में वापस आना पड़े। लेकिन इन सबसे परे एक कर्मचारी का त्यागपत्र सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। शख्स ने अपने बॉस को संबोधित किए अपने त्यागपत्र में सिर्फ तीन शब्द लिखा था- बाय-बाय सर। इसका एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ट्विटर पर इसे @MBSVUDU नाम के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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