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झांकी : हार-जीत योगी के जिम्मे

  • अजय भट्टाचार्य

हार-जीत योगी के जिम्मे
आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में भाजपा प्रचारकों की सूची में न तो प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी का नाम है और न केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का। इसका सीधा अर्थ यह है कि हार-जीत के लिए बाबा जी जिम्मेदार होंगे। दोनों ही सीटों पर सपा का दबदबा रहा है। जाहिर है संभाव्य हार को भांपकर शीर्ष पुरुष प्रचार के पुरुषार्थ से बच रहे हैं। उपचुनाव में प्रचार के लिए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ केंद्र से राजनाथ सिंह, डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, पंकज चौधरी, कौशल किशोर, मुख्तार अब्बास नकवी, साध्वी निरंजन ज्योति, प्रो. एसपी सिंह बघेल और बीएल वर्मा को स्टार प्रचारक बनाया है। साथ ही प्रदेश सरकार ने मंत्रियों की फौज भी प्रचार के लिए उतार दी है, जिनमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री बेबी रानी मौर्य, एके शर्मा, नंदगोपाल गुप्ता नंदी, अनिल राजभर, जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, जसवंत सिंह सैनी, बलदेव औलख और विजय लक्ष्मी गौतम, सूर्यप्रताप शाही, असीम अरुण, गिरीश यादव, धर्मपाल सिंह को प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा की तरफ से जारी सूची में मोदी और अमित शाह का नाम नहीं होना यह बताता है कि ये दोनों नेता उपचुनाव से दूरी बनाकर रखेंगे। संयोग और ‘किसी’ प्रयोग से अगर पार्टी जीत गई तो जीत का सेहरा शीर्ष पुरुष के ही सिर पर यह कहकर बांधा जाएगा कि उनके अभूतपूर्व मार्गदर्शन में पार्टी जीत गई।
‘आप’ का बिजली खेल शुरू
आम आदमी पार्टी गुजरात में भी अपना अनुभूत फॉर्मूला आजमाने के लिए जुट गई है। महंगी बिजली के खिलाफ पार्टी पूरे गुजरात में आंदोलन कर रही है और महंगे बिजली बिल जला रही है। पार्टी के सभी नेता इस आंदोलन में शामिल हैं। पिछले वर्ष फरवरी में हुए सूरत नगर निगम में २७ सीटें जीतने के बाद ‘आप’ भी गुजरात विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने को तैयार है। इससे पहले पार्टी गुजरात में ‘परिवर्तन यात्रा’ और ‘तिरंगा यात्रा’ आयोजित कर चुकी है। महंगे बिजली बिलों के खिलाफ आंदोलन के बाद पार्टी राज्य में कुछ शर्तों के साथ मुफ्त बिजली देने का चुनावी चारा फेंकने की तैयारी में है। नवनियुक्त राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव इसुदान गढ़वी ने का दावा है कि उसके कार्यक्रमों को राज्‍यों के लोगों का भारी जनसमर्थन हासिल हुआ है। गुजरात की १८२ सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं और ‘आप’ यहां सत्तारूढ़ भाजपा का मुकाबला करने का प्रयास कर रही है।
खुद को हटाने के लिए हस्ताक्षर करेंगे राज्यपाल?
राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के चांसलर पद से राज्यपाल को हटाने की पूरी प्रक्रिया राज्यपाल से होकर ही गुजरती है। बंगाल कैबिनेट की बैठक में प्रस्तावों पर मंजूरी के बाद विधानसभा में भी बिल पास हो गया है। बिल पर हस्ताक्षर के लिए राज्यपाल के पास ही भेजना होगा अर्थात राज्य के विश्वविद्यालयों के आचार्य पद से राज्यपाल को हटाने के लिए राज्यपाल से ही अनुमति लेनी होगी। इसलिए यह चर्चा तेज है कि क्या खुद को हटाने के लिए विधेयकों पर राज्यपाल मंजूरी देंगे? राजभवन में बिल को लेकर कितना समय लग सकता है या नहीं भी लग सकता है, यह कहना मुश्किल है। ऐसे में सरकार दूसरा रास्ता अपना सकती है। इससे पहले हावड़ा नगर निगम अमेंडमेंट बिल को लेकर राज्यपाल और स्पीकर के बीच विवाद जारी है।
पाक का गधा गौरव बरकरार
पाकिस्तान ने गधों की आबादी में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश होने का गौरव बरकरार रखा है। इस सप्ताह जारी वित्तीय वर्ष २०२१-२२ के लिए पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण में अन्य पशुओं के अलावा गधों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कृषि और पशुधन को प्राथमिकता देता रहा है। इसी कड़ी में गधों का चीन को निर्यात करना एक बड़ा हिस्सा है। जानवर इतना महत्वपूर्ण है कि २०२१ में पाकिस्तान की हिट एनिमेटेड फिल्म द डोंकी किंग चीन में रिलीज हुई थी। पिछले साल इमरान खान सरकार के खिलाफ नेशनल असेंबली के बजट सत्र में विपक्ष ने ‘गधा राजा की सरकार नहीं चलेगी’ के नारे लगाए थे। २०२१-२०२२ में पाकिस्तान में गधों की आबादी बढ़कर ५.७ मिलियन हो गई। पिछले वित्त वर्ष २०२०-२१ में गधों की संख्या बढ़कर ५६ लाख थी।

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