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झांकी : पूजा पर बखेड़ा

  • अजय भट्टाचार्य

पूजा पर बखेड़ा
गया के प्राचीन विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पूजा अर्चना पर बखेड़ा हो गया है। विष्णुपद मंदिर में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। यह मंदिर के बाहर साफ अक्षरों में लिखा भी हुआ है। बावजूद इसके अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री इसराइल मंसूरी भी नीतीश के साथ मंदिर में प्रवेश कर गए और पूजा भी की। इससे मंदिर प्रशासन नाराज बताया जा रहा है। मंदिर प्रशासन की ओर से कहा गया है कि कोई मुस्लिम मंदिर में जानबूझकर प्रवेश कर गया। हमें उस वक्त जानकारी नहीं थी। हम चेहरे को पहचान नहीं सके। जो स्थानीय लोग थे, उन्हें रोकना चाहिए था। आगे की कार्रवाई मंदिर प्रशासन के लोगों की एक बैठक के बाद की जाएगी। दूसरी ओर इसराइल मंसूरी का भी बयान सामने आ गया है। उन्होंने कहा है कि यह एक संयोग है कि मैं नीतीश कुमार के साथ गर्भ गृह में प्रवेश किया और मुझे पूजा करने का अवसर मिला।
नक्सलियों से भिड़ेंगे उभयलिंगी
देश में पहली बार नक्सली मोर्चे पर उभयलिंगी समाज की तैनात होगी। और अपनी बहादुरी से नक्सलियों के दांत खट्टे करेंगी। दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग में नक्सलियों से लड़ने के लिए `बस्तर फाइटर फोर्र्स’ का गठन कर २,१०० युवाओं की भर्ती की है, जिसमें ९ उभयलिंगी भी शामिल हैं। कांकेर जिले की दिव्या निषाद को शारीरिक परीक्षा में १०० में १०० मिले हैं। अपनी कहानी बताते हुए निषाद का कहना है जब उनका स्वभाव लड़कियों की तरह होने लगा तब पापा-भाई डांटते, मारते और घर छोड़कर जाने के लिए कहने लगे तो तंग आकर घर छोड़कर रायपुर के शेल्टर होम में रहने लगी। भीख मांगकर जीवन यापन शुरू किया। बस्तर फाइटर में भर्ती होने की जानकारी मिलते ही उसमें आवेदन किया और आरक्षक में चयन हुआ, अब नक्सलियों से लड़ेंगे। दिव्या निषाद की तरह सीमा प्रधान और हिमांशी को भी परिवार और समाज से तिरस्कार मिला। लेकिन अब ये बस्तर फाइटर में नक्सलियों से लड़ना चाहती हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं। देश में पहली बार है कि नक्सल मोर्चे पर उभयलिंगी तैनात होंगी।
घोटाले से लाल बत्ती पर ताले
शिक्षक भर्ती घोटाले की आंच से तप रही तृणमूल में पार्टी स्तर पर नेताओं को जनता के बीच जाकर डैमेज कंट्रोल करने की हिदायत दी जा रही है। साथ ही तृणमूल के मंत्रियों को अब दिखावेपन की जगह जनता के साथ जितना अधिक हो दिखने का दिशा-निर्देश दिया गया है। मंत्रियों को अब सादगी के साथ रहना होगा। एक मंत्री ने साफ कहा कि लाल बत्ती हो पायलट कार इसकी जरूरत कुछ जगहों पर होती है, बावजूद इसके अगर मुख्यमंत्री कह रही हैं कि इनका इस्तेमाल अब नहीं करना है तो मतलब नहीं करना है। राज्य के पर्यावरण मंत्री डॉ. मानस रंजन भुइयां ने अपनी गाड़ी में लगी लाल बत्ती पर कवर चढ़ा दिया। इसी तरह मंत्री बेचाराम मन्ना ने भी अब से अपनी गाड़ी में लाल बत्ती का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
सभरवाल चर्चा में
बिलकिस बानो केस को लेकर गुजरात की नौकरशाही में इन दिनों तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की सचिव स्मिता सभरवाल चर्चा का केंद्र बनीं हुई हैं। सभरवाल ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की, `एक महिला और एक सिविल सेवक के रूप में, मैं बिलकिस बानो मामले की खबर पढ़कर अविश्वास में बैठती हूं, हम उनके सांस लेने के अधिकार को नहीं छीन सकते। फिर से बिना किसी डर के आजाद हो और खुद को आजाद देश (हैश टैग जस्टिस फॉर बिलकिस बानो) कहें। इस पोस्ट ने पूरे देश में, खासकर गुजरात में नौकरशाही और राजनीतिक हलकों में एक बहस छेड़ दी है। गुजरात के कई नौकरशाहों ने `अनौपचारिक रूप से’ स्मिता के साहसिक कदम की सराहना की, जबकि कुछ ने प्रतिक्रिया नहीं देने का फैसला किया। लेकिन एक अन्य नौकरशाह का कहना है उसे केंद्र द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें किसी अन्य राज्य सरकार के फैसले की निंदा करने वाले ऐसे बयान देने के नतीजों के बारे में पता होना चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)

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