मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : मालामाल पार्टी, बंगाल में कंगाल

झांकी : मालामाल पार्टी, बंगाल में कंगाल

अजय भट्टाचार्य

मालामाल पार्टी, बंगाल में कंगाल
सबसे ज्यादा चुनावी चंदा बटोरनेवाली देश की सबसे धनवान पार्टी भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई फिलहाल फंड की कमी से गुजर रही है। सिलीगुड़ी महकमा परिषद व पंचायत चुनाव आ रहे हैं लेकिन फंड की कमी के कारण चुनाव प्रचार सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। इस कारण फंड के लिए प्रदेश भाजपा के नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व से गुहार लगाई। पिछले सप्ताह के बीच में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार व संगठन महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती दिल्ली पहुंचे थे। तब संघ नेताओं के साथ बैठक के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भाजपा नेताओं ने राज्य में पार्टी की सांगठनिक परिस्थिति को लेकर चर्चा के अलावा प्रदेश भाजपा का फंड खाली होने की जानकारी दी और आर्थिक सहयोग की मांग की। संघ नेतृत्व के साथ राज्य में संगठन विस्तार व लोकसभा चुनाव की तैयारी को लेकर सुकांत के साथ विस्तृत चर्चा हुई। इन नेताओं को गुटबाजी भूलते हुए चुनावी तैयारी साथ मिलकर करने का निर्देश दिया गया।
‘एक डाके अभिषेक’
‘दीदी के बोलो’ अभियान चलाकर जिस तरह तृणमूल ने जनता के बीच अपनी पैठ बनाई थी, उसी तर्ज पर पंचायत चुनाव से पहले तृणमूल ने ‘एक डाके अभिषेक’ अभियान चलाकर जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। इसके साथ ही तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के ८ साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इसके अलावा अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को सुनने तथा उनके समाधान के लिए अभिषेक ने टोल फ्री नंबर जारी किया, जिस पर कॉल करने पर लोग अपनी समस्याएं बताते हैं तो उसका तुरंत निवारण किया जाएगा। ‘एक डाके अभिषेक’ अभियान के तहत ७८८७७७८८७७ टोल फ्री  नंबर जारी किया गया है। डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र के लोग इस पर फोन कर अपनी समस्या या किसी भी तरह की परेशानी बता सकते हैं। यह समस्या सीधे सांसद के पास पहुंचेगी, जिस पर जितनी जल्दी हो सके काम किया जाएगा।
३३ साल बाद नौकरी
आंध्र प्रदेश के पथपत्तनम में पेद्दा सीधी के अल्लाका केदारेश्वर राव ३३ साल की उम्र में सरकारी शिक्षक पद के लिए परीक्षा पास करने के बावजूद जिंदा रहने के लिए सड़कों पर भीख मांग रहे थे। जिला चयन समिति (डीएससी)१९९८ की फाइल को मंजूरी मिलने के बाद राव अब ५७ साल के हो गए हैं, जो अपने सपनों की नौकरी में शामिल होने की कगार पर हैं। अपनी स्नातक तक शिक्षा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद राव ने १९९८ में सरकारी शिक्षकों के चयन के लिए डीएससी परीक्षा दी लेकिन कानूनी मुद्दों के कारण अंतिम चयन में देरी हुई। नौकरी की तलाश में अपनी मां के साथ हैदराबाद जाने से पहले, उन्होंने गांव में कई तरह का काम किया, लेकिन एक उपयुक्त नौकरी खोजने में असफल रहे। बेरोजगारी और उनकी मां की मृत्यु ने उन्हें अवसाद में धकेल दिया। उन्होंने अकेले रहने का फैसला किया क्योंकि उनके पास परिवार की देखभाल करने के लिए नौकरी नहीं थी। आठ साल पहले पेद्दा सीधी लौटे राव को उनके रिश्तेदारों ने अपने घरों में आने से मना कर दिया। उन्होंने भीख मांगना शुरू कर दिया।
तेरा टीवी मेरे टीवी से बड़ा कैसे 
गुजरात के हर मंत्री को अपने मातहत नौकरशाहों से इर्ष्या होना स्वाभाविक है। मंत्रियों को बाबुओं से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन गुजरात के नौकरशाहों ने अपवाद स्वरूप एक पहलू रखा है। सभी वरिष्ठ नौकरशाहों के कार्यालयों में दो टेलीविजन हैं। एक ६०इंच की बड़ी स्क्रीनवाला और एक छोटा ५२ इंचवाला। किसी को भी आश्चर्य हो सकता है कि एक नौकरशाह को दो-दो टीवी क्यों चाहिए? इसका जवाब भी दिलचस्प है कि नौकरशाहों को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों समाचारों पर नजर रखनी पड़ती है। अधिकांश बाबुओं के दफ्तरों में बड़ी टीवी पर राष्ट्रीय समाचार चैनल दिखाई देते हैं जबकि छोटे पर्दे क्षेत्रीय समाचारों के लिए आरक्षित होते हैं। यह स्थानीय कामकाज करते हुए राष्ट्रीय बने रहने का धांसू तरीका है! बड़े टीवी स्क्रीन कई लोगों के लिए ईर्ष्या का विषय बन गया है। पिछले सप्ताह एक वरिष्ठ नौकरशाह से मिलने आए एक मंत्री ने बड़बड़ाया, ‘यहां तक कि हमारे पास भी ऐसी विलासिता नहीं है।’

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)

 

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