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झांकी : ‘कुछ नहीं बदला’

अजय भट्टाचार्य

‘कुछ नहीं बदला’
सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद के लिए तृणमूल उम्मीदवार रूमा रेशमी एक्का का कहना है कि उनके स्कूल के दिनों से बहुत कुछ नहीं बदला है। एक बार जब अंधेरा छा जाता है, तो आप केवल क्रिकेट की भनभनाहट सुन सकते हैं। मोतीधर टोल गेट (एनएच ३१ पर) से ४ किमी की सड़क हमारे गांव खारुभंगा की एकमात्र कड़ी है। यह हमें विकसित दुनिया से जोड़ता है। २६ जून को सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद चुनाव का मतदान होना है। आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली रूमा बांग्ला और सदरी फिल्मों की अभिनेत्री हैं जो सिलीगुड़ी से करीब ३५ किमी दूर, एसएमपी -९ फणसीदेवा से मैदान में है। रूमा शायद त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की पहली उम्मीदवार हैं, जिनकी कला की पृष्ठभूमि है। रूमा ने २०१२ में सिलीगुड़ी कॉलेज से स्नातक किया, भरतनाट्यम को जानती हैं और बंगाल सरकार द्वारा संचालित फिल्म निर्माण का कोर्स कर चुकी हैं।
तृणमूल का मोर्चा
महाराष्ट्र के सियासी घमासान में अब तृणमूल कांग्रेस ने दखल दिया है। गुवाहाटी के जिस होटल में शिवसेना के बागी विधायक ठहरे हुए हैं वहां गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस की तरफ से विरोध प्रदर्शन किया गया। होटल के बाहर बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता जमा हुए और मोर्चा लगाकर भाजपा विरोधी नारे लगाने लगे। इनका कहना था कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की जा रही है, जिसे रोका जाए। पुलिस ने इन्हें हिरासत में ले लिया है। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व असम तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष रिपुन बोरा कर रहे थे। विरोध में शामिल तृणमूल कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि असम की भाजपा सरकार अपने सारे संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है ताकि महाराष्ट्र सरकार को गिराया जा सके। रिपुन बोरा ने कहा कि असम भयंकर बाढ़ की चपेट में है। राज्य के बाढ़ पीड़ितों की मदद की बजाय असम सरकार एक दूसरे राज्य की सरकार को अस्थिर/गिराने की साजिश में व्यस्त है। यह शर्मनाक है।
मोदी की चाल, नीतीश बेहाल
झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राजग का उम्मीदवार घोषित कर प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी ने जो राजनीतिक चाल चली है, उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फंस चुके हैं। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर नीतीश कुमार का जो ट्रैक रिकॉर्ड रहा है और पिछले कुछ दिनों में भाजपा और जनता दल यूनाइटेड के बीच जो जबरदस्त टकराव की स्थिति पैदा हुई है, उसके बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा जिस उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेगी, नीतीश उसके नाम पर सहमत नहीं हो सकते हैं। द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा के बाद नीतीश कुमार के लिए उनके उम्मीदवारी का विरोध करना संभव नहीं होगा। २०१२ में जब नीतीश कुमार बिहार में भाजपा के साथ सरकार चला रहे थे तब नीतीश ने भाजपा से अलग लाइन लेते हुए यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति चुनाव के लिए समर्थन किया था। २०१७ में भी जब नीतीश राजद के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे तो उन्होंने फिर से अलग लाइन लेते हुए राजग उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन किया था। भाजपा की चाल सही साबित हुई। नीतीश मुर्मू का समर्थन करने की घोषणा कर चुके हैं।
जुगाड़ अधिकारी
बंगाल विधानसभा में विरोधी दल के नेता व भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी पर परिषदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी जमकर बरसे। पार्थ ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी असल में जुगाड़दार अधिकारी हैं। अगर ममता बनर्जी न होती तो अधिकारी परिवार अधिकारी न होता। सुवेंदु ने अपने क्षेत्र के शिक्षा के विकास के लिए किसी स्कूल  का ब्लैक बोर्ड नहीं लिया जबकि उन्होंने अपने लिए ब्लैक मनी ली है। विपक्ष के नेता होने के नाते उन्हें ये सब बातें ध्यान रखने की जरूरत है। आज वे जो भी हैं सब जुगाड़ किया गया है। पार्थ शिक्षक नियुक्ति में घोटाले को लेकर सुवेंदु पर निशाना साध रहे थे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)

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