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झांकी : बहुरूपिया

  • अजय भट्टाचार्य

बहुरूपिया
खरबूजे को देखकर अगर खरबूजा रंग बदलता है तो पार्टी को देखकर नेता भी अंग, ढंग, चाल, चरित्र, परिधान क्यों न बदले? रंग बदलने पर केवल गिरगिट का ही एकाधिकार नहीं होना चाहिए। वैसे रंग बदलने के मामले में नेताओं के आगे गिरगिट भी शर्मिंदा है, क्योंकि गिरगिट को आस-पास के वानस्पतिक वातावरण के आधार पर रंग बदलने में समय लगता है। दलबदलू नेता के बारे में ऐसा नहीं है। वह पार्टी बदलने से पहले ही रंग बदल लेता है। इसलिए परसों जब कोलकाता स्थित शहीद मीनार में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के कार्यक्रम में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी संघ के ‘गणवेश’ में पहुंचे तब शायद वे यह दिखाना चाहते थे जैसे जन्मजात संघ के सदस्य हों। उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष व सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो भी संघ के गणवेश में बैठे थे। यहां उल्लेखनीय है कि भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु ने कई बार खुद को संघ कार्यकर्ता बताया है। ऐसे में इस दिन वे सफेद शर्ट, खाकी रंग की फुल पैंट और माथे पर काली टोपी पहनकर संघ के कार्यक्रम में पहुंचे थे। कुल मिलाकर उन्होंने खुद को संघ के पुराने कार्यकर्ता के तौर पर ही पेश किया। शुभेंदु ने अपनी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। हालांकि इस पर कटाक्ष करते हुए तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष ने शुभेंदु को बहुरूपिया बताया।
रेड्डी सीबीआई की जिम्मेदारी
अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की घोषणा करनेवाले पूर्व मंत्री और खनन कारोबारी जी जनार्दन रेड्डी, उनकी पत्नी और उनके स्वामित्व वाली कंपनियों की `अतिरिक्त संपत्तियों’ को कुर्क करने के लिए कर्नाटक सरकार ने बरास्ता हाईकोर्ट सीबीआई अधिकृत कर दिया है। मजेदार बात यह है कि जब तक रेड्डी भाजपा के हमदर्द थे, तब तक राज्य सरकार ने ऐसी अनुमति देने में लगातार देरी की थी। पिछले साल २५ दिसंबर को रेड्डी ने एक नई राजनीतिक पार्टी `कल्याण राज्य प्रगति पक्ष’ शुरू करने की घोषणा की थी। राज्य के बेल्लारी जिले के बाहर से चुनावी राजनीति में दोबारा प्रवेश करते हुए रेड्डी ने कहा था कि वे कोप्पल जिले के गंगावती से २०२३ का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। सीबीआई ने बेल्लारी अवैध खनन मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ कुर्की की कार्यवाही को मंजूरी देने के लिए अदालत से सरकार को निर्देश देने की मांग की थी। सीबीआई का अनुरोध अगस्त २०२२ से सरकार के समक्ष लंबित था। सीबीआई ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में रेड्डी, उनकी पत्नी और कंपनी के नाम पर अतिरिक्त संपत्तियों का पता लगाया था। एजेंसी २०१३ से एक विशेष अदालत के समक्ष लंबित अवैध खनन मामले में उन संपत्तियों को कुर्क करना चाहती थी।
पूर्व मंत्री संकट में
गुजरात में भारी भरकम बहुमत के साथ दूसरी बार मुख्यमंत्री बने भूपेंद्र पटेल की पहली सरकार के दो पूर्व मंत्री इन दिनों मुश्किल में हैं। पूर्व नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह, यौन अपराध के लिए सुर्ख़ियों में हैं और उन पर पोस्को अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। वहीं एक अन्य के खिलाफ कबूतरबाजी (अवैध आप्रवासन में सहायता) के आरोप हैं। उसने कथित तौर पर लोगों को अवैध रूप से अमेरिका भेजने के लिए ५ करोड़ रुपए लिए। उक्त मंत्री को इस बार टिकट नहीं दिया गया। इसलिए भूपेंद्र पटेल अपने दूसरे कार्यकाल में छोटा मंत्रिमंडल रखकर पार्टी की साफ-सुथरी छवि चमकाने में जुटे हैं।
 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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