मुख्यपृष्ठस्तंभसरोकार : जे.जे. अस्पताल में डोज फुल है!

सरोकार : जे.जे. अस्पताल में डोज फुल है!

• अब मरीजों से चाहे जितना भरे अस्पताल
• दवाओं का नहीं होगा कोई अकाल
• ९०% दवाइयां हाफकिन से खरीदी जाती हैं
• दो महीने में किया गया समस्या का हल

धीरेंद्र उपाध्या।  बीमार का हाल तो दवाओं से ही ठीक होता है। मगर कुछ समय पहले मुंबई के सबसे बड़े व प्रतिष्ठित जे.जे. अस्पताल को दवाओं की किल्लत से जूझना पड़ा था। ऐसे में मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। मगर अब अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी साफले के प्रयासों से इस समस्या का हल निकल गया है और अब मुंबई के इस सबसे प्रमुख अस्पताल में मरीजों के लिए दवाओं का फुल डोज उपलब्ध है।

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से जे.जे. अस्पताल को दवाइयों की किल्लत के चलते फजीहत झेलनी पड़ रही थी। लेकिन लगता है अब इससे निजात पाने का मार्ग अस्पताल प्रशासन ने ढूंढ़ निकाला है। इस संदर्भ में अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी साफले ने बताया कि अपने अधिकार का उपयोग कर एक महीने की दवाइयों सहित गैर-सर्जिकल वस्तुओं को खरीदा जाएगा, वहीं सामान के भंडारण पर नजर रखने के लिए तीन डॉक्टरों की टीम का भी गठन किया गया है। ऐसे में अस्पताल में दवाओं की किल्लत काफी हद तक अब दूर हो गई है।
हाफकिन खरीदता है दवा
बता दें कि हाफकिन की तरफ से पूरी दवाएं खरीदी जाती हैं। पूरे बजट में से ९० प्रतिशत खरीदी हाफकिन से करनी होती और १० प्रतिशत लोकल खरीदारी का अधिकार होता है। इसलिए जीवनरक्षक और आपातकाल में उपयोग होनेवाले ड्रग लोकल पर्चेस से खरीदे जाते हैं। हालांकि विभिन्न कारणों के चलते दवाओं की खरीदी में देरी होने की बात सामने आई है।
प्रशासन ने समस्या को गंभीरता से लिया
जे.जे. अस्पताल में दवाइओं की अनुपलब्धता के चलते रोगियों की हो रही दुर्दशा के मुद्दे को गंभीरता से लिया गया था। इस समस्या को हल करने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। इसके तहत कुछ हद तक दवाओं की खरीदी और वितरण शुरू कर दिया गया है।
अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी साफले ने बताया कि अब तक दवाइयां और सर्जिकल से जुड़े सामान को हाफकिन के माध्यम से ही खरीदा जाता था। हालांकि हाफकिन की तरफ से हो रही देरी के चलते अब दवाइयों के साथ जरूरी सामानों को डीन के अधिकारों का उपयोग कर खरीदा जाएगा। डॉ. साफले ने कहा कि दवाओं, परीक्षण और सर्जरी से जुड़े सामानों की निगरानी के साथ ही बीच-बीच में समीक्षा करते रहने के लिए तीन डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। इस टीम में शामिल डॉ. श्यामल सिन्हा को दवाइयों, डॉ. गिरीश बख्äशी को सर्जिकल और डॉ. पूर्वा पाटील को रियेजन लैब की जिम्मेदारी दी गई है।
हर महीने होगी स्टॉक की जांच
अस्पताल में गठित डॉक्टरों की यह टीम हर महीने की ५ तारीख को दवाओं के साथ जरूरी सामान के स्टॉक की जांच करेगी, जिसकी रिपोर्ट चार दिन के भीतर देनी होगी। ऐसे में रिपोर्ट के आधार पर दवाओं और जरूरी किट आदि सामान की खरीदी में आसानी होगी। डॉ. साफले ने कहा एक महीने का स्टॉक साथ में ही खरीदा जाएगा। इससे दवाओं की शॉर्टेज कम होगी। इतना ही नहीं, यदि किसी महीने में दवाइयों की खपत अधिक होती है तो उसके समाप्त होने से पहले फिर से दवाओं को खरीदना संभव होगा।

मरीजों को हो रही थी परेशानी
राज्य सरकार द्वारा संचालित जे.जे. अस्पताल बीते दिनों दवाओं की कमी की मार झेल रहा था। अस्पताल में मेडिसिन उपलब्ध न होने से मरीजों के परिजनों को बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही थीं। इससे लोगों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि अस्पताल के डीन अपने अधिकार का उपयोग कर दवाएं खरीद सकते हैं, जिससे इस समस्या का सरलता से निदान हो सकेगा।
-धर्मेंद्र सिंह, स्थानीय नागरिक

मरीजों के हित का निर्णय
मुंबई के जे.जे. अस्पताल में गरीब परिवार के बजट में उपचार होता है। यहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े लोग इलाज करवाने के लिए आते हैं। हालांकि बीच में अस्पताल जरूरी दवाओं की किल्लत से जूझ रहा था, जिसे अब दूर किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का यह निर्णय मरीजों के हित में लिया गया है।
-प्रीति अग्रवाल, स्थानीय नागरिक

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