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मविआ में शामिल हुआ … ‘वंचित बहुजन आघाड़ी’ … जारी किया गया अधिकृत पत्र

सामना संवाददाता / मुंबई 
आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महाविकास आघाड़ी की ओर से जोर-शोर से तैयारियां शुरू हो गई हैं। साथ ही सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ मजबूत गठबंधन बनाने के लिए कई छोटी-बड़ी पार्टियों को इंडिया गठबंधन में शामिल किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से वंचित बहुजन आघाड़ी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेतृत्ववाली महाविकास आघाड़ी में शामिल होने की इच्छा जता रही थी। वंचित आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर कहते थे कि हमें भाजपा के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। लेकिन महाविकास आघाड़ी में अन्य घटक दलों के साथ वंचित के राजनीतिक मतभेदों को देखते हुए, इस गणित को बिठाना मुश्किल हो रहा था। कल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राऊत, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले की अगुवाई में हुई बैठक में सर्वसम्मति से वंचित बहुजन आघाड़ी को महाविकास आघाड़ी में शामिल कर लिया गया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने इस संबंध में ट्विटर (एक्स) पर एक पोस्ट कर इसकी अधिकृत जानकारी दी। बाद में उन्होंने बताया कि सपा, आप, शेकाप, सीपीआई को भी महाविकास आघाड़ी में शामिल किया गया है। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सीट आवंटन पर चर्चा के लिए कल नरीमन पॉइंट स्थित ट्राइडेंट होटल में महाविकास आघाड़ी की ओर से एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वंचित बहुजन आघाड़ी, सपा, आप सहित अन्य दलों को भी आमंत्रित किया गया था। वंचित के प्रवक्ता धारिशवर्धन पुंडकर उपस्थित थे। धारिशवर्धन पुंडकर ने मांग की थी कि एक आधिकारिक पत्र दिया जाए कि वंचित बहुजन आघाड़ी महाविकास आघाड़ी में एक घटक दल है। इसके मुताबिक, आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि शिवसेना के संजय राऊत, कांग्रेस के नाना पटोले और एनसीपी के शरद पवार के समर्थन से वंचित बहुजन आघाड़ी को महाविकास आघाड़ी में शामिल किया गया है।

क्या लिखा है पत्र में? 
वंचित बहुजन आघाड़ी को दिए गए पत्र में कहा गया है कि महान लोकतांत्रिक परंपरा वाला देश तानाशाही की ओर बढ़ता जा रहा है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भारत को महान संविधान दिया। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र की वकालत की। आज यह सब पैरों तले रौंदा जा रहा है। लोगों को आशंका है कि साल २०२४ में अगर देश में अलग नतीजे आए तो ये शायद आखिरी चुनाव होगा। हम जानते हैं कि इस स्थिति को बदलने और राज्य तथा देश में बदलाव लाने के लिए महाविकास आघाड़ी की स्थापना की गई थी। आप खुद देश की तानाशाही के खिलाफ लड़ रहे हैं।  हम इसके लिए आपको धन्यवाद देते हैं। पत्र में कहा गया है, ‘यह हमारी स्थिति है कि वंचित बहुजन आघाड़ी को अब से आधिकारिक तौर पर महाविकास आघाड़ी में शामिल होना चाहिए।

 

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