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कल्पना फ्रेंड्स सर्कल कर रहा है गरीब विद्यार्थियों का सपना साकार

अनिल मिश्रा / उल्हासनगर

वैसे तो उल्हासनगर में देखा जाय तो शिक्षादान, अन्नदान, वस्त्रदान के अलावा धार्मिक कर्मकांड में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाले लोग हैं। इसके अलावा गरीब, जरूरतमंद बच्चे सौ रुपए में शिक्षा लें सकें इसके लिए कल्पना फ्रेंड सर्कल नामक संस्था लंबे समय से पुस्तक देने का कार्य कर रही है। सर्कल के इस सस्ते दर पर पुस्तक देने से कई बच्चे उन पुस्तकों के सहारे आज उच्च पद पर पहुंचे हैं।
उल्हासनगर कैंप नंबर तीन, राज्य कामगार बीमा योजना अस्पताल के समीप स्थित कल्पना फ्रेंड्स सर्कल के हरनाम चांदवानी (मानद महासचिव) ने बताया कि सन 1966 से यह संस्था गरीब, जरूरतमंद विद्यार्थियो को सौ रुपए में पाठ्य पुस्तक की सहायता देती आ रही है। ग्यारहवीं से ग्रेजुएशन तक (आर्ट, साइंस तथा कॉमर्स) इसके अलावा प्रतियोगिता व मार्गदर्शन (मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ, आईएएस, आयपीएस जैसी अन्य प्रतियोगिता की पढ़ाई से संबधित पुस्तक यहां पर दी जाती है। ग्रेजुएशन एक की गाइड, डाइजेस्ट जैसी पुस्तक दी जाती है। यह पुस्तक ऐसे बच्चों को दिया जाता है, जो उल्हासनगर के अलावा अन्य किसी भी कॉलेज में पढ़ रहे होते हैं। एक साल के लिए तीन सौ रुपए लिए जाते हैं।
रिजल्ट निकलने के 10 दिन के भीतर ली गई पुस्तक को जमा करने पर सौ रुपए काट कर दो सौ रुपए तुरंत वापस कर दिया जाता है। पहले जब यह संस्था शुरू हुई, उस समय 100 लोग पुस्तक लेते थे। आज तीन हजार के करीब लोग पुस्तक लेकर पढ़ रहे हैं। पुस्तक के खराब होने या फिर स्लैबस बदलने पर नई पुस्तक लिया जाता है। इस संस्था में 22 मेंबर हैं। उनके द्वारा डोनेशन (अनुदान) दिया जाता है। सर्कल को राजनिति से दूर रखा गया है। सर्कल ने शहर वासियों से निवेदन किया है कि जो लोग किताबें दान देना चाहते हैं, वे दे सकते हैं। शर्त यह है कि दी गई किताबें रद्दी की बजाय उपयोगी होनी चाहिए। सर्कल की लाइब्रेरी मंगलवार को बंद रहती है। रविवार को सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक खुली रहती है। उसके सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार तथा शनिवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तथा शाम को साढ़े पांच से सात बजे तक खुली रहती है। इस समय पुस्तक के लेने-देने का काम किया जाता है। पुस्तक सेवा में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता है।
चांदवानी ने बताया कि जब उनकी कल्पना फ्रेंड्स सर्कल की लाइब्रेरी के बच्चे, जो उच्च पद पर पहुंचे हैं मिलते हैं तो बड़ा ही हर्ष होता है। जल्द ही ऐसे बच्चे का एक मिलन समारोह रखने की मंशा है। आज काफी सफल बच्चे जिनकी कल्पना के चलते सपना पूरा हुआ़ है, ऐसे लोग संस्था को डोनेशन दे रहे हैं, जिससे कल्पना सर्कल और अधिक लोगों का सपना साकार कर सके। कल्पना फ्रेंड्स सर्कल के चलते सफल बच्चे जो डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील बने हैं। उनकी मुस्कराहट को देखकर सर्कल के पदाधिकारियों को अपार हर्ष होता है। एक नहीं, सैकड़ों बच्चे आज ऊंचाइयों की मुकाम पर कल्पना की लाइब्रेरी के सहयोग से पहुंचे। इस संस्था में सभी सदस्य नि:शुल्क सेवा देते हैं।

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