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नीतिश के साथियों पर कमल-नयन! एक और चिराग पासवान मॉडल की तैयारी थी- लल्लन सिंह

  • जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का खुला आरोप
  • फिर गठबंधन साथी की पार्टी में ही सेंध लगाएगी भाजपा!

सामना संवाददाता / पटना
सबका साथ अपना विकास की नीति पर चलनेवाली भाजपा ने पार्टी में पहले अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ सहयोगियों को और फिर विरोधियों को निपटाने का खास गुजरात मॉडल तैयार किया है। खासकर समान विचारधारा वाले सहयोगियों में फूट डालकर मतभेद को हवा देना और फिर बागी गुट को अपना बनाकर सहयोगियों को कमजोर या खत्म करने के इस खास भाजपाई मॉडल का बिहार में चिराग पासवान और मुकेश सहनी शिकार बन चुके हैं। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद (आरसीपी) सिंह के माध्यम से यही खेल भाजपा सहयोगी नीतिश कुमार की जदयू के साथ खेल रहे हैं। यानी नीतिश के साथियों पर कमल नयन है। बिहार में एक और चिराग मॉडल की तैयारी की बात जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह सहित तमाम लोग कह रहे हैं।
बता दें कि विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने के बाद भी सीएम पद से वंचित रहने का दर्द भाजपा को हमेशा सताता रहा है। इसकी झलक जदयू और भाजपाई नेताओं के बीच समय-समय पर होनेवाली शाब्दिक मुठभेड़ के रूप में देखने को मिलती रही है। लेकिन जेडीयू में कभी नंबर दो की हैसियत रखनेवाले आरसीपी सिंह की बगावत के बाद बिहार में ‘चिराग पासवान’ मॉडल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दबी जुबान में ही सही लेकिन इसके लिए एक बार फिर भाजपा को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ऐसी चर्चा है कि नीतिश और उनकी पार्टी को खत्म करने के लिए आरसीपी सिंह पर भाजपा लंबे समय से डोरे डाल रही थी। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कल पत्रकारों से कहा कि २०१९ में पहले ही तय हो गया था कि जदयू केंद्रीय  मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगा। ललन ने आगे कहा कि हमारे खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं। पहले चिराग पासवान मॉडल लाया गया। अब एक और मॉडल लाने की तैयारी हो रही थी। मगर जेडीयू के खिलाफ कोई षड्यंत्र नहीं चलेगा।
नीतिश की नीति नहीं माने आरसीपी
उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी, आरसीपी सिंह ने १९९० के दशक के अंत में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए नीतिश कुमार का विश्वास जीता था। आरसीपी सिंह ने राजनीति में आने के लिए २०१० में वॉलेंटियर रिटायरमेंट (वीआरएस) लिया था। आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले पांच वर्षों के दौरान नीतिश कुमार के प्रमुख सचिव के रूप में कार्य किया था। पिछले साल, नीतिश कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पद छोड़ने का फैसला  किया था। आरसीपी सिंह ने अपने संरक्षक की जगह ली और कुछ ही समय बाद केंद्र में कैबिनेट बर्थ हासिल कर ली। जदयू ने आरसीपी को राज्यसभा नहीं भेजा आरसीपी सिंह ने नीतिश कुमार की सहमति के बिना मंत्री पद स्वीकार किया था। नीतीश सहयोगी दलों के लिए भाजपा की ‘सांकेतिक प्रतिनिधित्व’ की नीति के विरोध में थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश की नाखुशी जल्द ही उजागर हो गई जब आरसीपी सिंह को पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने के लिए कहा गया। आरसीपी को जदयू की ओर से राज्यसभा कार्यकाल नहीं दिया गया। इसके बाद आरसीपी को कैबिनेट बर्थ खोना पड़ा।
पूर्व केंद्रीय  मंत्री व जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके आरसीपी सिंह ने शनिवार को देर शाम जदयू छोड़ने का एलान कर दिया। आरसीपी ने कहा कि उन्होंने अपना त्याग पत्र जदयू के प्रदेश अध्यक्ष को भेज दिया है।

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