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कमंडल बनाम मंडल! …बिहार में ओबीसी की संख्या ६३ प्रतिशत

नीतीश सरकार ने की जातिवार सर्वेक्षण की घोषणा
सामना संवाददाता / पटना
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट की आखिरकार घोषणा हो गई। बिहार के मुख्य सचिव ने आज गांधी जयंती के मौके पर बिहार में जातिवार जनगणना की रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में ओबीसी की संख्या ६३ फीसदी है, जबकि अनुसूचित जाति की संख्या १९.६५ फीसदी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव से पहले जातिवार जनगणना करा कर बड़ा कदम उठाया है।
२०२४ के लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में जातिवार जनगणना के आंकड़े सोमवार को जारी किए गए। बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबलानी ने इन आंकड़ों की घोषणा की। इन आंकड़ों के मुताबिक, बिहार की ६३ फीसदी आबादी पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की है। बिहार की जनसंख्या १३ करोड़ ७ लाख २५ हजार ३१० है। हिंदुओं की कुल संख्या ८२ प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम १७.७ प्रतिशत हैं। अन्य आबादी में बौद्ध, सिख, ईसाई और जैन शामिल हैं। २,१४६ लोग निधर्मी हैं। बिहार में ३६.१ फीसदी आबादी ओबीसी, २७.१२ फीसदी पिछड़ा वर्ग, १९.६५ फीसदी अनुसूचित जाति, १५.२२ फीसदी सामान्य (खुला) वर्ग और १.६८ फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है। जातिवार जनगणना रिपोर्ट जारी होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनगणना टीम को बधाई दी, वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के सर्वेसर्वा लालू प्रसाद यादव ने खुशी जाहिर की। आज गांधी जयंती पर हम सभी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हैं, उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की।
जाति के अनुसार जनगणना प्रतिशत
सामान्य वर्ग- १५.५२ प्रतिशत
पिछड़ा वर्ग- २७.१२ प्रतिशत
ओबीसी- ३६.१ प्रतिशत
अनुसूचित जाति- १९.६५ प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति- १.६८ प्रतिशत
धर्मानुसार जनसंख्या
यादव- १४.२६ प्रतिशत
रविदास- ५.२५ प्रतिशत
दुधास- ५.३१ प्रतिशत
कोइरी- ४.२१ प्रतिशत
ब्राह्मण- ३.६७ प्रतिशत
राजपूत- ३.४५ प्रतिशत
दो चरणों में हुई जनगणना
बिहार में जातिवार जनगणना दो चरणों में कराई गई थी। पहला चरण ७ जनवरी से २१ जनवरी २०२३ तक पूरा किया गया, जबकि दूसरे चरण को १५ अप्रैल से १५ मई २०२३ तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, जातिवार जनगणना को अदालत में चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जातिवार जनगणना का रास्ता साफ कर दिया।
चुनाव में दिखेंगे नतीजे
बिहार में जातिवार जनगणना का असर आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव पर पड़ने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में ८५ प्रतिशत के मुकाबले १५ प्रतिशत की घोषणा की गई। इसका असर आगामी २०२४ के लोकसभा चुनाव में भी दिखने की संभावना है।

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