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जेएनपीटी में ‘कांदा फ्राय’! …केंद्र के फैसले से लटके पड़े हैं २०० कंटेनर

सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र द्वारा प्याज निर्यात पर लगाई ४० फीसदी ड्यूटी के कारण जेएनपीटी में फंसे प्याज के २०० कंटेनर से भारी नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही है यानी ‘कांदा फ्राय’ होना तय माना जा रहा है। बता दें कि विदेशों में निर्यात होने वाले प्याज के २०० कंटेनर जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) बंदरगाह पर फंसे हुए है। इन कंटेनरों में ४०० टन प्याज भरी हुई है। अचानक निर्यात शुल्क लगाए जाने से विदेश जानेवाले प्याज की कीमत ४० फीसदी तक बढ़ गई है। इस वजह से विदेशी व्यापारियों ने प्याज खरीदने से इनकार कर दिया और निर्यात के लिए आया प्याज जेएनपीटी बंदरगाह पर पड़ा हुआ है।
जेएनपीटी पोर्ट की तरह नासिक से भी प्याज का निर्यात बंद हो गया है। अगर अगले दो दिनों में इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो कंटेनरों में प्याज सड़ने से व्यापारियों और किसानों को करोड़ों का नुकसान होगा। भारत से हर महीने करीब २,५०० हजार कंटेनर एशियाई देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन अब व्यापारियों ने नाराजगी जताई है, क्योंकि केंद्र सरकार के फैसले से प्याज के निर्यात पर भारी असर पड़ेगा। प्याज के निर्यात पर ४० फीसदी शुल्क लगाए जाने से किसानों पर भारी मार पड़ेगी।
किसानों ने प्याज बेचना किया बंद
नासिक में किसानों ने प्याज बेचना बंद कर दिया है। किसानों के समर्थन में नई मुंबई कृषि बाजार समिति (एपीएमसी) में प्याज-आलू बाजार बंद रहने की संभावना है, वहीं अगर वाशी में प्याज और आलू बाजार बंद हो जाता है तो इसका असर शहरवासियों पर पड़ेगा। प्याज की कीमतें पहले से ही कम हैं और निर्यात शुल्क बढ़ने से स्थानीय बाजार में प्याज की आमद बढ़ेगी। अगर ऐसा हुआ तो फिलहाल १८ से २२ रुपए किलो बिकने वाला प्याज १० रुपए के अंदर आ सकता है। इसलिए किसानों के साथ-साथ व्यापारी भी मांग कर रहे है कि केंद्र सरकार निर्यात शुल्क हटाए।
नासिक जिला व्यापारी संघ ने जिले की १४ समितियों (बाजार समिति) की नीलामी बंद कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा प्याज पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर ४० फीसदी किए जाने से राज्य में किसान और व्यापारी आक्रामक हो गए हैं। इससे भविष्य में खुदरा बाजार में प्याज की कीमत कम होने की आशंका है। इसलिए केंद्र सरकार के पैâसले के विरोध में नासिक जिले की १४ बाजार समितियां सोमवार से अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गई हैं। यह निर्णय लासलगांव बाजार समिति में नासिक जिला प्याज व्यापारी संघ की बैठक में लिया गया है।
‘यह तो किसानों को बर्बाद करने का प्रयत्न’
केंद्र सरकार ने प्याज निर्यात पर ४० प्रतिशत कर लगाया है। सरकार के इस निर्णय से देशभर के किसानों द्वारा विरोध किया जा रहा है। यह निर्यात शुल्क ३१ दिसंबर तक लागू होने के कारण किसानों को बड़ा झटका लगेगा। इसलिए अनेक क्षेत्रों के किसान आंदोलन कर रहे हैं इस पर विधान परिषद विरोधी दल नेता अंबादास दानवे ने निर्यात शुल्क रद्द करने की मांग करते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर टिप्पणी की है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को बर्बाद करने का प्रयत्न कर रही हैं।
केंद्र का यह निर्णय किसानों की अपेक्षा को नहीं करेगा पूरा
केंद्र सरकार ने प्याज निर्यात के संदर्भ में बढ़ाए गए शुल्क को लेकर महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों ने कड़ा विरोध किया है। प्याज उत्पादक किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद केंद्र सरकार ने २ लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदने का निर्णय लिया है। इस पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के इस निर्णय से किसानों की अपेक्षा पूर्ण नहीं होगी। उन्होंने किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए निर्यात शुल्क में कमी करने की मांग की।
प्याज निर्यात शुल्क बढ़ोतरी के मुद्दे पर शिंदे गुट मोदी सरकार से नाराज
केंद्र सरकार ने ३१ दिसंबर तक प्याज पर शुल्क लगा दिया है। इसका असर देश के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी दिखाई दे रहा है। राज्य में प्याज की समस्या गंभीर होती जा रही है। इस मुद्दे पर शिंदे गुट के प्रवक्ता और विधायक संजय शिरसाट ने कहा कि केंद्र सरकार को हर बार किसान को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जब किसान आंदोलन करेंगे तो सबको परेशानी होगी। इसी प्याज के कारण तत्कालीन कांग्रेस की दिल्ली सरकार चली गई थी। इसलिए केंद्र सरकार को किसानों को कमजोर मानकर नहीं चलना चाहिए, ऐसे शब्दों में शिंदे गुट के प्रवक्ता ने मोदी सरकार को गीदड़ भभकी दी है।

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