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कृष्णमय हुई काशी… गंगा बनी यमुना… संपन्न हुई काशी के लक्खा मेला में शुमार नागनथैया श्रीकृष्ण लीला

उमेश गुप्ता / वाराणसी

काशी के तुलसीघाट पर कार्तिक शुक्ल चतुर्थी शुक्रवार की शाम को सैकड़ों साल पुरानी परंपरा ‘नागनथैया’ लीला फिर जीवंत हो उठी। गेंद निकालने के लिए कान्हा के कदम के पेड़ से छलांग लगाते ही हर तरफ वृंदावन बिहारी लाल और हर-हर महादेव का जयघोष गूंज उठा। अद्भुत पलों के दर्शन के लिए घाटों-छतों से गंगा में नावों-बजड़ों तक जनसैलाब उमड़ा था।
काशी में उत्तर वाहिनी गंगा गुरुवार को यमुना में तब्दील हो गईं। यमुना के तट पर श्रीकृष्ण सखाओं के साथ कंदुक क्रीड़ा में मग्न हैं। खेलते-खेलते गेंद यमुना में समा गई। प्रभु श्रीकृष्ण ने कदंब की डाल से 4:40 बजे यमुना रूपी गंगा में छलांग लगाई तो तुलसी घाट पर लीला देख रहे श्रद्धालुओं की सांसें मानों थम सी गईं। इस दौरान कुछ क्षण तक लोग आश्चर्य से लहरों को निहारते रहे। सहसा नटवर नागर कालिया नाग के फन पर बंसी बजाते हुए नदी के बीचों बीच प्रकट हुए तो सुरसरि का किनारा जय श्री कृष्ण, हर-हर महादेव और डमरुओं की निनाद से गुंजायमान हो उठा।
यह दृश्य था शुक्रवार को लगभग पांच सौ साल पुरानी श्रीकृष्ण लीला नागनथैया के दौरान। भगवान ने एक बार फिर से प्रदूषण के प्रतीक कालिया के फनों को नाथ दिया। प्रदूषण रूपी फुंफकार से यमुना के प्रवाह और गोकुल-वृंदावन की आबोहवा में जहर घोल रहे कालिया का दर्प भंगकर भगवान श्रीकृष्ण ने प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया।
परंपरागत रूप से कालियदहन की लीला के साक्षी काशी राज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह भी बने। परंपरा अनुसार, अनंत नारायण सिंह और संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने भगवान कृष्ण को माला पहनाई। लोगों ने भगवान के स्वरूप की आरती उतारी। संपूर्ण लीला क्षेत्र वृंदावन बिहारी लाल की जयकारे से गूंजता रहा।
कालियादह की लीला के साक्षी बनने के लिए तुलसीघाट पर दोपहर बाद से ही भीड़ जुटने लगी थी। पांच मिनट की अनूठी लीला के दर्शन के लिए अस्सी घाट से लेकर निषादराज घाट तक नौकाएं और बजड़े पटे रहे। काफी संख्या में विदेशी पर्यटक भी मौजूद रहे। इनमें से कुछ ऐसे भी श्रद्धालु थे, जो पहली बार काशी के इस लक्खा मेले को देखने के लिए आए थे।
इस अवसर पर उपस्थित संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा, आज जरूरत है कि जन-जन भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाए। भगवान ने जिस तरह से कालिया नाग का मान-मर्दन कर यमुना को प्रदूषण से मुक्त किया, उसी तरह गंगा के उद्धार के लिए कदम उठाने की जरूरत है। कालिया नाग के प्रतीक स्वरूप नालों को गंगा में गिरने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।

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