मुख्यपृष्ठसमाचारकश्मीर की कसीस!

कश्मीर की कसीस!

-आतंकवाद से त्रस्त आबादी आंदोलन की राह पर

-मासूमों की मौत पर घाटी में उबाल

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

कश्मीर अब बदल गया है। मासूमों की मौत पर खामोश रहनेवाले कश्मीरी अब अपने गुस्से और रोष को जाहिर करने लगे हैं। तीन साल पहले जिन कश्मीरियों ने कभी लाल चौक पर मोमबत्तियां जलाकर सीडीएस जनरल विपिन रावत को श्रद्धांजलि देने की हिम्मत दिखाई थी, अब वे आतंकियों से सीधे तो नहीं भिड़ पा रहे, पर मासूमों की मौत पर गुस्सा प्रकट करने के लिए कैंडल मार्च का सहारा जरूर ले रहे हैं, उन्हें गांधीगीरी का रास्ता ही भा रहा है।
कश्मीर के पुलवामा और शोपियां जिले में आतंकवाद के खिलाफ नागरिकों और व्यापार मंडल ने कैंडल मार्च निकाला। लोगों ने कहा कि श्रीनगर में दो निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई। वे तो पंजाब से सिर्फ रोजगार की तलाश में कश्मीर आए थे। उनका क्या कसूर था, जो उनकी हत्या कर दी गई। इस तरह बेगुनाहों का खून बहाकर आखिर आतंकियों का कभी भला नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि वे और हिंसा बर्दाश्त नहीं कर सकते। अब वे कश्मीर में शांति चाहते हैं।
श्रीनगर में आतंकवादियों द्वारा पंजाब के दो निवासियों की हत्या की निंदा करने और उनके परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए पूरे कश्मीर में कई स्थानों पर कैंडल लाइट मार्च आयोजित किए गए। नागरिक समाज के सदस्य, व्यापारी महासंघ और बारामुल्ला के नागरिक देर रात को एकत्र हुए और श्रीनगर में दो निर्दोष नागरिकों की हत्या की निंदा करते हुए एक कैंडल लाइट मार्च निकाला। प्रतिभागियों ने मोमबत्तियां पकड़ रखी थीं और मार्च मुख्य चौक से नानक भवन तक गुजरा और लक्षित हत्याओं के निर्दोष नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की। दृढ़ निश्चय के साथ, प्रतिभागियों ने अधिकारियों से इस घृणित कृत्य के लिए जिम्मेदार अपराधियों की शीघ्रता और लगन से पहचान करने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि उन्हें कानून की पूरी सीमा के तहत जवाबदेह ठहराया जाए।
इसी तरह पुलवामा में स्थानीय निवासियों, सिविल सोसाइटी पुलवामा के सदस्यों और व्यापारियों ने कैंडल मार्च निकाला। कुपवाड़ा में लोगों ने कुपवाड़ा बस स्टैंड से मार्च शुरू किया, जो कुपवाड़ा बाईपास से गुजरने के बाद फाउंटेन चौक रिगीपोरा में समाप्त हुआ। हालांकि, लाल चौक का नाम जहन में आते ही आतंकी हमलों, देश विरोधी नारेबाजी और कभी-कभी वहां तिरंगा फहराने की कोशिशों को पुलिस द्वारा ‘नाकाम’ बनाए जाने की घटनाएं जेहन में कौंध जाती होंगी, पर इसी लाल चौक में मोमबत्तियां जलाकर किसी को श्रद्धांजलि देने की खबर मिले तो वाकई चौंक जाना पड़ता है और यकीन करना मुश्किल लगता है, पर ऐसा १० दिसंबर २०२१ को हुआ था। यह सब सीडीएस जनरल बिपिन रावत के कश्मीर के साथ मधुर संबंधों के कारण हुआ था। दरअसल, कश्मीरी युवाओं ने १० दिसंबर २०२१ को देर रात को श्रीनगर के लाल चौक में मोमबत्तियां जलाकर हेलिकॉप्टर हादसे में वीरगति पानेवाले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और अन्य ११ अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सभी को चौंका दिया था।

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