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कथा अनंता : ये चाल, चलन और चेहरे

डॉ. अनंत श्रीमाली

ये चाल, चलन और चेहरे
चुनावी दौर के दौरान एक नेता ने कहा- ‘मेरे साथ दौरे पर चलो।’ मैंने कहा, ‘मुझे दौरा पड़ जाएगा क्‍योंकि मेरे आज के राशिफल में कुसंगति से बचने की सलाह है।’ तवा गरम देख मैंने कहा, ‘मैं अभी मॉरीशस से आया हूं, वहां की सड़कें बहुत बढ़िया हैं।’ उन्‍होंने तुरंत कहा कि आप तो अपना कीमती वोट मुझे दो, मैं मॉरीशस की सड़कें  हिंदुस्थान में लाने का वादा करता हूं। हकीकत ये है कि मोहल्‍ले की सड़क वे आज तक ठीक नहीं करवा पाए हैं। नेताओं को अपने कर्म पर शर्म भी नहीं आती है। त्रिपुरा, बधारघाट के भाजपा विधायक मिमी मजूमदार एक गरीब वृद्ध भारती देबनाथ नामक महिला से पैर धुलवाते-तौलिए से सुखाते नजर आए। जब आलोचना और सोशल मीडिया पर हल्‍ला हुआ तो बेशर्मी से बोले-‘स्‍नेह से बेटी मानकर पैर धुलवाए।’ हमारे यहां तो पिता तक बेटी के पांव छूते हैं, ससुराल जाने पर उसके घर का पानी तक नहीं पीते…और ये चाल, चलन, चेहरे वाले…
शादी खूबसूरत दुर्घटना
मेरे एक मित्र पिछले साल ही शादी से उठे, नहीं निपटे, मतलब शादी की गति को प्राप्‍त हुए हैं। शादी के बाद आदमी निर्बल बाबा बन जाता है और पत्‍नी पर ही सारी कृपा अटकी रहती है। पत्‍नी वासी पति को दुखी होने के बावजूद मुस्‍कुराना पड़ता है। पत्‍नी सम्‍मानजनक संदेह से देखती है। शादी का मतलब पारदर्शिता से चूना लगाना है। जैसे, ‘कभी किसी को मुकम्‍मल जहां नहीं मिलता…’ पर शादी बूस्‍टर डोज है, इसके बाद कुछ नहीं हो सकता। मैंने मित्र से पूछा- ‘शादी के लड्डू के चक्‍कर में इतनी जल्‍दी कैसे फंसे ?’ तो बोले- विज्ञापन में ये पंक्ति नहीं पढ़ पाया कि ‘गऊ सी कन्‍या को कोल्‍हू का बैल चाहिए।’ लंबे समय तक ‘हंसिका’ लिखनेवाली डॉ. सरोजिनी प्रीतम लिखती हैं, ‘जीना तेरी गली में, मरना तेरी गली में…’ बेचारे पति की सड़ी-गली परंपरा में जिंदगी पड़ी सड़ती रहती है। अब मित्र दार्शनिक हो गया है, कहता है, पत्‍नी के डांटने का कोई मौसम नहीं होता है, हमें मानसिक रूप से डांट खाने के लिए तैयार रहना चाहिए, इससे दु:ख कम होता है। जैसे कल मेरी पत्‍नी ने बिना वजह डांट दिया, मैंने दबे स्‍वर (स्‍वर ऊंचा हो ही नहीं सकता, वरना एक डांट और) में जोरदार विरोध किया तो पत्‍नी ने कहा कि तुम्‍हारी भावी गलती मैं एडजस्‍ट कर दूंगी…अब तो डांट में मजा आने लगा है, जिस दिन डांट न पड़े तो लगता है महादेवी परेशान हैं या तबीयत खराब है, ऐसी पत्‍नी ईश्‍वर सबको दे। पिछले सप्‍ताह ‘वट पूर्णिमा’ पर खबर आई कि संभाजीनगर, वालुंज में पुरुष १०८ उल्‍टे फेरे  लेकर पत्नियों से पीछा छुड़ाने की कामना करते हैं। ‘पत्‍नी पीडित पुरुष आघाड़ी’ संस्‍था द्वारा बनाए आश्रम में २०१२ से पत्‍नी से प्रताड़ित, लताड़ित, पीड़ित पति वट पूर्णिमा मनाते हैं। एक तरफ पत्नियां ७ जन्‍मों तक इसी पति के मिलने की और पति कामना करते हैं कि ऐसी पत्‍नी के साथ ७ सेकेंड  भी साथ न रहें…
सीमेंट-फर्नीचर भी भोजन
घर में कुछ काम के लिए खुदाई करवानी थी पर मिस्‍त्री होशियार था, उसने कहा कि साब, समय ठीक नहीं है, खुदाई में पता नहीं कुछ और या आपके अरमानों की कब्र ही निकल आए… देश में बलवा-बवाल हो जाएगा। आजकल हर दल इसे लेकर एक-दूसरे के लिए गड्ढे खोद रहा है… जापान, टोक्‍यो विवि के शोधकर्ता माशिंदा व युया सकाई ने बेकार भोजन से सीमेंट बनाई है। इस सीमेंट से घर बना सकते हैं, खा भी सकते हैं। शोध में फूड  सीमेंट से बने अस्‍थायी फर्नीचर भी बनाए हैं, जो खाने योग्‍य है। लानत है, ऐसे शोधकर्ताओं पर, क्‍या नवीनता है, हमारे यहां डायरेक्‍ट (बिना तुले) सीमेंट, पुल, बालू, सरिया खाने की परंपरा है। सरकारी आवास खाली करते समय नल की टोंटी, फर्नीचर सब सीधे खाने का रिवाज है। हम जापान से आगे हैं, बशीर जी का शेर है, खुदा हमको ऐसी खुदाई न दे कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे…
गुड़ गोबर व गड़बड़झाला…
लतीफा है, महिलाएं शराब से इतनी नफरत क्‍यों करती हैं? उत्तर था, पीने के बाद चूहा पति शेर बन जाता है। भोपाल की सांसद प्रज्ञा ने ज्ञान दिया कि शराब सस्‍ती हो या महंगी, औषधि का काम करती है तो मप्र की पूर्व मुख्‍यमंत्री उमा भारती ने बुंदेलखंड की अयोध्‍या कही जानेवाली निवाड़ी के ओरछा में शराब दुकान पर गाय का गोबर फेंका  और पूछा कि राम नगरी के दरवाजे पर पहले भी शराब की दुकान थी और अब भी है। वे उस समय भी दुकान पर पत्‍थर फेंक चुकी हैं। इसके पहले उन्‍होंने भोपाल के मिसराद क्षेत्र के आशिमा मॉल की शराब दुकान पर डेढ़ घंटे की चौपाल लगाई। गंगा दशहरे पर गंगोत्री का जल पिया और लोगों से शराब छोड़ने की सलाह दी। दोनों महिलाएं एक ही दल की हैं। ये लीपा-पोती अपुन गोबर गणेश की समझ में नहीं आई। लोग पंकज उधास की गजल समझ, थोड़ी-थोड़ी पिया करो…

(लेखक सुप्रसिद्ध व्‍यंग्‍यकार, मंच संचालक और स्‍तंभकार हैं)

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