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हमें अंधेरे में रखकर सूरत ले गए! गुवाहाटी से लौटे कैलाश पाटील, नितिन देशमुख ने बताई आपबीती

सामना संवाददाता /मुंबई
हमें अंधेरे में रखकर सूरत ले जाया गया। हम कहां जा रहे हैं, यह भी जानकारी हमें नहीं दी गई, वहां पहुंचने पर पुलिस की फौज हमारे पीछे लगा दी गई। हमारे साथ प्रकाश आबिटकर भी वहां से निकलने का प्रयत्न कर रहे थे, लेकिन हमें रास्ते से जबरदस्ती वापस ले जाया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह वेश बदलकर हम वहां से बाहर निकले, ऐसी आपबीती नितिन देशमुख और वैâलाश पाटील ने बताई। विधायक कैलाश पाटील और नितिन देशमुख ने गुरुवार को पत्रकार परिषद लेकर अपने ऊपर बीते घटनाक्रम को मीडिया के समक्ष बयां किया। ग् इस मौके पर अपना अनुभव बताते हुए वैâलाश पाटील ने कहा कि विधान परिषद में मतदान होने के बाद मुझे एकनाथ शिंदे के बंगले पर ले जाया गया और वहां से हमें एक अलग काम से दूसरी जगह पर जाना है, ऐसा बोल कर ठाणे स्थित महापौर बंगले पर ले जाया गया। साहेब आगे हैं और हमें उनके पास जाना है, ऐसा बताया गया। वहां हमारी गाड़ी बदल दी गई। ठाणे पीछे छूट गया और हम आगे चलते गए। काफी रफ्तार से गाड़ी गुजर रही थी, हमें शंका हुई कि कुछ तो गड़बड़ है। आगे चेक पोस्ट पर नाका बंदी लगी हुई थी। मन में आशंका हुई कि हमें किसी गलत दिशा में ले जाया जा रहा है। गाड़ी में एक ने कहा कि नाकाबंदी लगी हुई है, आगे चलें क्या? इस मौके का फायदा उठाने का पैâसला किया। मैंने दरवाजा खोला और गाड़ी से बाहर निकलते ही पीछे की तरफ चलने लगा, मुंबई की तरफ ३०० से ४०० मीटर चलने पर आभास हुआ कि मुझे गाड़ी में बैठे लोग ढूंढ रहे हैं। मोटरसाइकिल चालक और ट्रक चालक की मदद से हम दहिसर तक पहुंचे, यहां से हमें ले जाने के लिए साहेब ने एक व्यक्ति को भेजा। वह ट्रक चालक मेरे लिए देवदूत साबित हुआ। जिस शिवसेना ने मुझे जिला परिषद सदस्य बनाया, जिलाप्रमुख बनाया, विधायक बनाया उनके साथ गद्दारी करना मेरे भीतर नहीं है। गुवाहाटी से लौटे कैलाश पाटील, नितिन देशमुख ने बताई आपबीती

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