मुख्यपृष्ठधर्म विशेषकेतु ग्रह माना जाता है षड्यंत्र का कारक!

केतु ग्रह माना जाता है षड्यंत्र का कारक!

काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद
 डॉ. बालकृष्ण मिश्र
विद्यावारिधि (पी.एच.डी-काशी)

गुरु जी, मेरी राशि क्या है और समय कैसा चल रहा है?
– रमेश सक्सेना
(जन्मतिथि- २६ अप्रैल १९८६, समय- सायं ७.३५ बजे, स्थान- कल्याण)
रमेश जी, आपका जन्म तुला लग्न एवं वृश्चिक राशि में हुआ है। भाग्येश चंद्र नीच राशि का होकर द्वितीय भाव में शनि के साथ बैठकर आपके मन को व्यग्र बना रहा है जिससे मन में तमाम प्रकार की नकारात्मक बातें भी आती हैं। इस समय केतु की महादशा चल रही है। आपकी कुंडली में केतु लग्न में बैठकर लग्न को भी दूषित कर दिया है तथा सप्तम भाव पर सूर्य, राहु के साथ लाभेश सूर्य बैठकर लाभ भाव को भी दूषित कर दिया है। ग्रहण योग एवं कालसर्प योग भी बना दिया है। कालसर्प एवं ग्रहण योग की पूजा वैदिक विधि से कराएं। जीवन को विकसित करने का हर मार्ग प्रशस्त हो सकता है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाएं।

गुरु जी, मैं व्यापार करता हूं, पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। सफलता के लिए कोई उपाय बताएं? – मुकेश गुप्ता
(जन्मतिथि- ३० अक्टूबर १९७५, समय- दिन में १०.४० बजे, स्थान- प्रयागराज, यूपी)
मुकेश जी, आपका जन्म वृश्चिक लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। लग्नेश एवं रोगेश होकर मंगल अष्टम भाव में बैठकर लग्न को कमजोर कर दिया है। पराक्रमेश एवं सुखेश शनि त्रिकोण भाग्य भाव में बैठकर आपको भाग्यशाली तो बना दिया है लेकिन इस समय आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि के द्वारा शुभ फल प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ एवं पीपल की परिक्रमा करना आपको आवश्यक है। आपकी वुंâडली में कालसर्प योग एवं पितृ दोष भी बन रहा है। इन दोनों की शांति भी कराना आपके लिए आवश्यक है तथा प्रतिदिन कुत्ते को मीठा बिस्किट जरूर खिलाएं, व्यापार में सफलता मिलने लगेगी। जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाएं।

गुरु जी, मेरी शिक्षा में रुकावट आ गई है। क्या करूं, कोई उपाय बताएं? – योगेश यादव
(जन्मतिथि- ११ अक्टूबर १९९९, समय- प्रात: ७.१५ बजे, स्थान- प्रयागराज, यूपी)
योगेश जी, आपका जन्म तुला लग्न एवं तुला राशि में हुआ है। प्राथमिक शिक्षा की जानकारी पंचम भाव से देखी जाती है एवं उच्च शिक्षा की जानकारी दशम भाव से देखी जाती है। सुख पंचमेश व शनि नीच राशि का होकर सप्तम भाव में बैठकर शिक्षा भाव को कमजोर बना दिया है। त्रिकोण का स्वामी यदि केंद्र में बैठता है तो परिश्रम के बाद पूर्ण सफलता जरूर प्राप्त करता है लेकिन शनि वक्री होने के कारण सुख भाव में बैठा केतु तथा कर्म भाव में बैठा राहु काल सर्प योग भी बना रहा है। अत: धर्म का संग्रह करें, जिससे आप की शिक्षा में पुन: वृद्धि होगी लेकिन इन योगों की पूजा कराएं तथा गणेश सातमुखी रुद्राक्ष धारण करें, शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, बनते हुए काम भी बिगड़ जाते हैं। मन में गलत भावनाएं पैदा होती हैं, कोई उपाय बताएं?
– सरिता जायसवाल
(जन्मतिथि- ९ मार्च १९७३, समय- ७.३० बजे, स्थान – मालाड, मुंबई)
सरिता जी, आपका जन्म मीन लग्न एवं मेष राशि में हुआ है। कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया जाए तो आपका जन्म भरणी नक्षत्र में हुआ है। भरणी नक्षत्र में ही केतु का जन्म माना जाता है। केतु ग्रह षडयंत्र का कारक माना जाता है। इस कारण मन में कुविचार आ जाते हैं। किंतु आपकी कुंडली  में सुखेश एवं सप्तमेश होकर सुख भाव में ही बैठा है तथा द्वितीय एवं भाग्य मंगल आपकी कुंडली में बैठकर आपको भाग्यशाली तो बना दिया है। दशम भाव से कर्म भाव का विचार किया जाता है। राहु एवं मंगल के एकीकरण से चांडाल योग बन रहा है तथा आपकी वुंâडली में कालसर्प योग भी बन रहा है। इस समय राहु की महादशा में बुध का अंतर चल रहा है। कुविचारों का आना स्वाभाविक भी है। जीवन के हर प्रकार के विकास के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए कालसर्प योग एवं अंगारक योग की पूजा आवश्यक है। जीवन की विशिष्ट गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरी कुंडली में दोष क्या है, यदि कोई दोष है तो उपाय क्या करें? – सुजीत श्रीवास्तव
(जन्मतिथि- ३ फरवरी १९९०, समय- ९.१८ बजे, स्थान- जौनपुर, यूपी)
सुजीत जी, आपका जन्म मीन लग्न एवं मेष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। द्वितीयेश एवं भाग्येश मंगल दशम भाव में बैठकर आपको भाग्यशाली बनाया है लेकिन आपकी कुंडली में पंचम भाव पर केतु एवं लाभ भाव पर सूर्य के साथ में राहु बैठकर ग्रहण योग बना दिया है। इन योगों के कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। चंद्र द्वितीय भाव में अकेले हैं लेकिन चंद्रमा के आगे-पीछे कोई ग्रह न होने के कारण केमद्रुम योग भी बन रहा है। केमद्रुम योग के कारण जीवन में उतार-चढ़ाव भी संभव हो सकता है। जीवन को हर प्रकार से विकसित करने के लिए केमद्रुम योग एवं सूर्य ग्रहण योग की पूजा आवश्यक है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
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