मुख्यपृष्ठस्तंभएमपी में मामा का राज, भयभीत है हिंदू समाज!

एमपी में मामा का राज, भयभीत है हिंदू समाज!

शासन-प्रशासन की नाकामी का नतीजा है खरगोन दंगा
प्रमोद भार्गव/शिवपुरी-मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के जुलूस पर हुई पत्थरबाजी की आग दस दिन बाद भी ठंडी नहीं पड़ी है। दंगों से आहत हिंदुओं ने ९ दिन बाद कर्फ्यू में ढील के दौरान भी दुकानें बंद रखीं और इस पीड़ित समाज ने जिला प्रशासन व पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को अपर्याप्त मानते हुए असंतोष जताया। हिंदू समाज का कहना है कि उपद्रव के नामजद एवं वीडियो-फोटो से पहचाने गए आरोपितों पर जब तक संतुष्टिपूर्ण कार्रवाई नहीं होती है, तब तक सनातनी हिंदू कर्फ्यू में दी जाने वाली ढील के बावजूद अपने प्रतिष्ठान नहीं खोलेंगे। सोमवार को चार घंटे दी गई ढील के बावजूद व्यापारियों ने दुकानें नहीं खोलीं। हिंदुओं की इस अपील का असर इस तथ्य से जाना जा सकता है कि आवश्यक वस्तुओं की दुकानें भी लगभग बंद रहीं। इधर मुस्लिम समाज के हौसले इतने बुलंद हैं कि जिला मुख्यालय नीमच में इस समाज ने खरगोन की घटना पर हो रही कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए जुलूस निकाला और प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को आतंकवादी कहते हुए नारेबाजी भी की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ भी जबरदस्त आपत्तिजनक नारे लगाए और पुलिस कप्तान को ज्ञापन सौंपा। इस आपत्तिजनक नारेबाजी को लेकर पुलिस ने ११ लोगों के विरुद्ध नामजद मामला तो दर्ज कर लिया है लेकिन अपनी नाकामियों के चलते सरकार की स्थिति सांप-छंछूदर की गति को प्राप्त हो गई है। सरकार मुस्लिमों के बढ़ते और प्रदेश में पैâलते गुस्से को वह ठंडा नहीं कर पा रही है। ऐसे में कांग्रेस भी सरकार को घेरने का काम कर रही है।
दरअसल खरगोन में भगवान राम के जुलूस पर हुई पत्थरबाजी में सबसे ज्यादा कमजोर कलेक्टर अनुग्रह पी. साबित हुर्इं। एक तो प्रशासन निर्धारित जुलूस के अलावा एकाएक अनेक जगह से निकले जुलूसों को रोकने में नाकाम रहा, दूसरे पुलिस को जब जगह-जगह से पथराव व आगजनी की घटनाओं की सूचना मिली तो वह कई जगह मोर्चे संभालती रही। पुलिस कप्तान सिद्धार्थ चौधरी को जब खबर लगी कि संजय नगर में जुलूस पर पथराव हो रहा है और कुछ जगह दुकानों में आग भी लगाई जा रही है, तो वे तुरंत दल-बल सहित संजय नगर पहुंच गए और उपद्रवियों को समझाइश देने लगे। जबकि कई उपद्रवियों के हाथों में तलवारें थीं और गलियों व घरों की छतों से जुलूस पर पत्थर बरसाए जा रहे थे। इसी समय एसपी सिद्धार्थ चौैधरी के पैर में गोली लगी और वे ज्यादा खून बहने से गंभीर रूप से घायल भी हो गए। जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तत्काल इंदौर इलाज के लिए भेज दिया गया। आश्चर्य की बात यह रही कि कई जगह पत्थर व तलवारबाजी की घटनाएं सामने आने के बावजूद कलेक्टर बंगले से बाहर नहीं आर्इं। पत्रकारों ने जब उनसे हालात के जायजे और कानून व्यवस्था के बारे में पूछा तो उन्होंने अत्यंत बचकाना जवाब देते हुए कहा कि जब तक पत्थरबाजी हो रही जगहों पर पर्याप्त पुलिस का बंदोबस्त नहीं हो जाता, वे महिला होने के कारण मौके पर नहीं जाएंगी। यानी कलेक्टर ने अपने भीतर के डर और कमजोरी को जाहिर करने के साथ अक्षमता जता दी। बावजूद कलेक्टर अनुग्रह पी. के विरुद्ध शासन ने कोई कार्यवाही नहीं की। ऐसा इसलिए किया गया, जिससे प्रशासन की अक्षमता उजागार न होने पाए। इस पूरे मामले में जहां खुफिया एजेंसियां भी नाकाम रहीं, वहीं स्लीपर सेल दंगे भड़काने में अग्रणी रहा। जबकि स्थानीय सांसद व विधायक लगातार कलेक्टर को कह रहे थे कि लोग उनसे फोन पर कह रहे हैं कि कई मकानों में आग लगा दी गई है, उसे बुझाने व जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन महिला कलेक्टर को अपने दायित्व के निर्वहन से कहीं ज्यादा स्वयं को सुरक्षित बनाए रखने की चिंता रही।
खरगोन दंगे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केसरिया पर निशाना साधने के नजरिए से सरकार को घेरने का जल्दबाजी में ऐसा प्रयास किया कि खुद कठघरे में खड़े होना पड़ गया। उन्होंने गलती से बिहार की एक ट्वीट के साथ ऐसी मस्जिद का चित्र सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसमें भगवा झंडे फहरा रहे थे। इसे इस तरह पेश किया गया कि यह घटनाक्रम खरगोन की मस्जिद का है। इस चित्र के प्रसारित होते ही शिवराज सिंह और नरोत्तम मिश्रा ने इस घटना को मुस्लिम समुदाय को दंगे के लिए उकसाने का कारण मानते हुए कहा कि कांग्रेस नेता प्रदेश को दंगे की आग में झोंकना चाहते हैं, किंतु इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आखिरकार खरगोन के जिला भाजपा अध्यक्ष सुमित पचौरी की शिकायत पर दिग्विजय सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा दिया। हालांकि गलती का अहसास होते ही सिंह ने आपत्तिजनक टिप्पणी को विलोपित कर दिया था। नरोत्तम मिश्रा ने इस वाकये पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश को बदनाम करने की बात हो या सांप्रदायिक तनाव पैâलाने की दिग्विजय सिंह ऐसा करने के आदी रहे हैं। उन्होंने पहले भी पाकिस्तान के एक पल को भोपाल से जोड़ दिया था और अब बाहर की मस्जिद को मध्य प्रदेश से जोड़कर दिखा दिया। दिग्विजय सिंह का पोस्ट किया चित्र वास्तव में बिहार के मुजफ्फरपुर की मस्जिद का था।
हालांकि दंगे के बाद दंगाइयों के एक सैकड़ा मकान तोड़ दिए गए हैं। ४९ दर्ज आपराधिक मामलों में अब तक १५० से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उपद्रवियों से जुड़े अन्य वीडियो का तकनीकी परीक्षण चल रहा है। बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं क्योंकि जिले में दूसरी बार प्रभारी मंत्री कमल पटेल का दौरा रद्द किया गया है। दर्जनों हिंदू परिवार के मुखियाओं ने दंगाग्रस्त मुस्लिम बहुल बस्तियां छोड़ने का मन बना लिया है और कुछ ने तो मकान बेचने का बोर्ड भी लगा दिया है। भय की यह भीषण सतही तब है, जब केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकारें हैं। मतलब मामा के राज में हिंदू समाज सुरक्षित नहीं है। इसीलिए हिंदू समाज कर्फ्यू में ढील के दौरान बाजार बंद रखकर अपना प्रतीकात्मक विरोध के रूप में प्रतिकार जता रहा है। कुछ की तो अपने पड़ोसियों द्वारा हिंसक हो उठने की मंशा देख आंखें पथरा गई हैं।
(लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।)

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