मुख्यपृष्ठखेलखेल-खिलाड़ी : ...तो टेस्ट क्रिकेट की बल्ले-बल्ले!

खेल-खिलाड़ी : …तो टेस्ट क्रिकेट की बल्ले-बल्ले!

संजय कुमार
भारत और इंग्लैंड के बीच ५ टेस्ट मैचों की शृंखला क्रिकेट के दीवानों के लिए बेहद सुखद खबर है। हैदराबाद में २५ जनवरी से खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच से इसकी शुरुआत हो गई है। जमाना हो गया, जब ५ टेस्ट मैचों की शृंखला टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले २ देशों के बीच प्राय: कम वर्षों के अंतराल में खेली जाती थी। एकदिवसीय और फिर टी-२० क्रिकेट की बढ़ी लोकप्रियता के कारण तो क्रिकेट का यह ‘बेस्ट फॉर्मेट’ लुप्तप्राय सा होने लगा है। हाल ही में टीम इंडिया दक्षिण अप्रâीका के साथ मात्र २ टेस्ट मैच ही खेल पाई। दक्षिण अप्रâीका से पहले हम वेस्टइंडीज में भी उनके खिलाफ मात्र २ मैचों की शृंखला ही खेले। इससे पहले न्यूजीलैंड, श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ भी हम २ टेस्ट मैचों की शृंखला ही खेलते रहे हैं। ३ टेस्ट मैचों की शृंखला खेलने से कम-से-कम शृंखला में हार-जीत के पैâसले का पता चल पाता है। तीनों टेस्ट ड्रॉ भी हो जाए तो दोनों टीमों के मजबूत और कमजोर पक्ष उभर कर सामने आते हैं।
क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में भूमिका अदा कर रहे टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच, इससे भी पहले ८० टेस्ट मैच खेल चुके और अपने करियर में वेस्टइंडीज के खिलाफ एकमात्र टेस्ट में कप्तानी करने वाले रवि शास्त्री ने तो दक्षिण अप्रâीका के साथ खेले गए दूसरे टेस्ट में कमेंट्री करने के दौरान साफ कहा कि मात्र २ टेस्ट मैच खेलने के लिए कभी भी राजी नहीं होना चाहिए। रवि शास्त्री ने वैâरियर का पहला टेस्ट मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ फरवरी १९८१ में खेला था। उनके पास अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने, भारतीय क्रिकेट टीम को कोच करने और फिर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की कमेंट्री करने यानी भिन्न-भिन्न भूमिका में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से जुड़े रहने का ४० वर्षों से भी ज्यादा का अनुभव है। जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के इतने अनुभवी क्रिकेटर रवि शास्त्री टेस्ट मैचों की शृंखला पर्याप्त संख्या में खेले जाने की वकालत कर रहे हैं तब यह मानना होगा कि क्रिकेट का ‘बेस्ट फॉर्मेट’ कहा जानेवाला ‘टेस्ट क्रिकेट’ बुरी तरह पीड़ित है।
ऐसा नहीं होना चाहिए कि सिर्फ ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ही क्रिकेट खेलने वाले दूसरे देशों से ४ या ५ टेस्ट मैचों की शृंखला खेलें। ‘टेस्ट क्रिकेट’ प्रथम श्रेणी क्रिकेट का एक रूप है, जो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के पूर्ण सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली टीमों के बीच खेला जाता है। क्रिकेट खेलने वाले ये देश एक-दूसरे के खिलाफ ३ या ५ टेस्ट मैचों की शृंखला खेलें और फिर इनमें से कोई ‘टेस्ट-क्रिकेट-चैंपियन’ बने तो उसके मान-सम्मान का ग्राफ बहुत ऊंचा चला जाएगा। भूलना नहीं चाहिए कि क्रिकेट की पहचान टेस्ट-क्रिकेट से है न कि एकदिवसीय या फिर मनोरंजन करने वाले टी-२० से।
५ टेस्ट मैचों की शृंखला से क्लास वन खिलाड़ी और अव्वल दर्जे की टीम की पहचान हो जाती है। ५ टेस्ट मैचों की शृंखला से खिलाड़ी को दी गई क्रिकेट की शिक्षा-दीक्षा, खिलाड़ी के धैर्य, खिलाड़ी के अनुशासन और खिलाड़ी के तकनीक की परीक्षा भलीभांति होती है। उत्कृष्ट गेंदबाजों की गेंदों को दक्षता के साथ खेलते हुए एक बल्लेबाज द्वारा विविध शॉट खेलने और इसी तरह एक गेंदबाज द्वारा भिन्न-भिन्न तरह की गेंदें डालकर एक बल्लेबाज की कमजोरियों को पकड़ने की काबिलियत को टेस्ट क्रिकेट के जरिए ही परखा जा सकता है।
५ दिन तक खेले जानेवाले टेस्ट मैच में गलती करने पर टीम को गलती सुधारते हुए मैच में दोबारा पकड़ बनाने का मौका भी मिलता है। इस तरह उस टीम और उसके खिलाड़ियों का खेल भी निखरता है। निरंतर खेल के निखरते जाने से ही एक सचिन तेंदुलकर और एक मुरलीधरन पैदा हो पाता है। खेल निखरते जाने से ही एक कप्तान द्वारा खेल की बारीकियों को पढ़ने और उन बारीकियों का फायदा उठाने की परीक्षा भी हो जाती है। ऐसा क्रिकेट खेलकर जब २ उत्कृष्ट टीमें मैदान पर ‘टेस्ट चैंपियन’ बनने के लिए आपस में मुकाबला करें तो टेस्ट क्रिकेट की बल्ले-बल्ले!

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