मुख्यपृष्ठटॉप समाचार६० फीसदी लोग मारते हैं.... फर्राटे से खर्राटे!

६० फीसदी लोग मारते हैं…. फर्राटे से खर्राटे!

१५ फीसदी की बंद नाक करती है नाक में दम
सामना संवाददाता / मुंबई । कुछ लोगों का नींद में खर्राटे लेना आम समस्या है लेकिन अब इस समस्या से ग्रस्त लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खर्राटे भरनेवालों की समस्या उनके साथ रहनेवालों के लिए बड़ी परेशानी साबित होती है। खासकर तब, जब वे कहीं मेहमानी में जाते हैं या लंबी दूरी की ट्रेनों-बसों आदि में सफर करते हैं। बात मुंबई की करें तो यहां ६० फीसदी लोग फर्राटे से खर्राटे भरते हैं। ऐसा ५०० लोगों पर किए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है। खर्राटे लेनेवाले ऐसे लोग खुद शांति से नींद नहीं ले पाते हैं साथ ही दूसरों की नींद में भी खलल डालते हैं। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि रात में सोते समय अचानक नाक बंद होने से १५ फीसदी लोगों की नींद टूट जाती है। इस सर्वे के दौरान सभी को नींद पूरी करने के तरीकों को भी सिखाया गया।
बता दें कि जुपिटर अस्पताल की तरफ से नींद की पद्धति और इसके टूटने की जानकारियों को इकट्ठा करने के लिए ऑनलाइन सर्वेक्षण किया गया। अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ. तरंग कुलकर्णी ने इस सर्वेक्षण का नेतृत्व किया।
४५ से ७० साल के लोगों का मिला प्रतिसाद
इस सर्वेक्षण को ४५ से ७० आयु श्रेणी के व्यक्तियों का अच्छा खासा प्रतिसाद मिला। इसमें शामिल सभी व्यक्तियों ने माना की खर्राटे के चलते उनकी नींद में बाधा पैदा हो रही है। वहीं कुछ ने रात में सांस बंद होने से नींद में दिक्कत पैदा होने की बात कही।
५०% को नहीं पता है यह बीमारी
नींद से जुड़ी समस्याओं के विशेषज्ञ डॉ. मानस मेंगर ने कहा कि नींद में गड़बड़ी आने के कारणों को लेकर लोग आज भी अनभिज्ञ हैं। इसे लेकर जोरदार तरीके से जनजागरण करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण में पाया गया है कि ५० फीसदी लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। जबकि ४० फीसदी लोगों की रात में नींद पूरी न होने से उन्हें दिन में थकावट जैसी समस्याएं होती हैं। उन्होंने कहा कि नींद में तेजी से सांस बंद होने की समस्या किसी मौसमी बीमारी की तरह पैâल रहा है। फिलहाल इस बीमारी पर आसानी से इलाज संभव है। इतना ही नहीं समय पर उपचार गंभीर दिक्कतों को दूर कर सकता है।
७ घंटे से कम सोते हैं अधिकांश लोग
पल्मोनॉलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. अल्पा दलाल ने कहा कि आयु के अनुसार हमारे शरीर की नींद की आवश्यकताओं में बदलाव आता है। एक निरोगी प्रौढ़ व्यक्ति को रोजाना रात में ७-८ घंटे और किशोरों और छोटे बच्चों को रोजाना करीब १० घंटे से अधिक नींद की जरूरत होती है। हालांकि सर्वे में पाया गया कि ७० फीसदी से अधिक लोग सात घंटे से भी कम सोते हैं।
ओएसए नींद से संबंधी है विकार
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) सबसे आम नींद से संबंधित श्वास विकार है। हालांकि ओएसए के बड़ी संख्या में शिकार मरीजों का निदान समय पर नहीं हो पाता है। यदि बीमारी का समय पर निदान कर उपचार नहीं किया जाता है तो मरीज हाई ब्लड प्रेशर, ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक आदि का शिकार हो सकता है। बीमारी के शिकार व्यक्ति में पूर्ण नींद न आने, थकान और दिन के समय उत्साह न होने की समस्या पैदा हो सकती है।

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