मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी

किस्सों का सबक : ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी

दीनदयाल मुरारका। किसी भी व्यक्ति के जीवन में ईमानदारी का गुण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। गोपाल कृष्ण गोखले हिंदुस्थान के ऐसे स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक थे, जो अपने साथियों के बीच ईमानदारी के पर्याय माने जाते थे। उनके बचपन का एक प्रसंग है, जो गोखले की ईमानदारी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पेश करता है। वे जब महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के काटलुक गांव में एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते थे, तब एक बार उनके अध्यापक ने ईमानदारी पर सभी विद्यार्थियों के विचार जानने की जिज्ञासा से एक प्रश्न किया। प्रश्न कुछ इस तरह का था- यदि तुम्हें रास्ते में एक हीरा मिल जाए तो तुम उसका क्या करोगे? एक विद्यार्थी ने कहा, मैं इसे बेचकर धनवान बन जाऊंगा। दूसरे ने कहा, मैं इसे बेचकर विदेश यात्रा करूंगा। तीसरे विद्यार्थी ने कहा, मैं उस हीरे के मालिक का पता लगाकर उसे लौटा दूंगा। तीसरे विद्यार्थी का उत्तर सुनकर अध्यापक चकित रह गए। उन्होंने उस विद्यार्थी से कहा, मान लो बहुत पता लगाने पर भी उस हीरे का मालिक अगर तुम्हें न मिले, तब क्या करोगे? वो बोला कि तब मैं हीरे को बेचूंगा एवं उससे मिले पैसे को देश की सेवा में लगा दूंगा। अध्यापक बालक का उत्तर सुनकर बहुत खुश हुए और बोले, शाबाश! तुम बड़े होकर सच्चे देशभक्त बनोगे। वो विद्यार्थी अपनी ईमानदारी से ओत-प्रोत विचारों के चलते महान स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले के नाम से प्रसिद्ध हुआ। ईमानदारी एक ऐसा गुुण है, जो इंसान को समाज में बड़ा बनाती है, भले ही उसकी पूंजी दिखाई न दे, किंतु उसके बड़प्पन का अहसास सामने वाले को तुरंत हो जाता है।

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