मुख्यपृष्ठधर्म विशेषकिस्सों का सबक: ओलिंपिक का अनोखा रिकॉर्ड

किस्सों का सबक: ओलिंपिक का अनोखा रिकॉर्ड

दीनदयाल मुरारका। नादिया एलीना बचपन से ही बहुत चुस्त और जोश से भरपूर थी। नादिया को उछल-कूद बहुत पसंद था। उसकी रुचि को देखते हुए ६ साल की उम्र में ही उसका एडमिशन जिमनास्टिक में करा दिया गया। मात्र ८ साल की आयु में उन्होंने अपने जीवन की पहली प्रतियोगिता रोमानिया नेशनल चैंपियनशिप में भाग लिया और वह १३वें स्थान पर रहीं।
सन् १९७१ में मात्र १० वर्ष की आयु में उन्होंने पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और अपने जीवन का पहला ऑल राउंड किताब जीतकर अपनी टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। १३ वर्ष की आयु तक तो नादिया अनेक स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी थी। हर खिलाड़ी की तरह नादिया भी चाहती थी कि वह ओलिंपिक में पदक जीते।
वह बेसब्री से सन् १९७६ में मॉन्ट्रियल ओलिंपिक का इंतजार कर रही थी। इस ओलिंपिक में नादिया का इंतजार खत्म ही नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने एक ऐसा इतिहास रच दिया जो आज तक अविस्मरणीय है। इन खेलों के दौरान उन्हें सात बार अधिकतम अंक यानी परफेक्ट टेन हासिल हुए। यहां नादिया ने तीन स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता। वे मांट्रियल ओलिंपिक की एक ऐसी नायिका बनकर सामने आई, जिसका रिकॉर्ड टूटना भी एक अविस्मरणीय घटना होगी।
जब वे जिम्नास्ट करती थीं तो दर्शक दांतों तले उंगली दबा लेते थे। अधिकतर जिम्नास्ट, नादिया को जिम्नास्ट का चमत्कार मानते थे। नादिया को जिम्नास्टिक प्रतियोगिता में १९८० के मास्को ओलिंपिक में पत्रकारों ने उनकी सफलता का राज पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि हमेशा आसान जीवन के लिए प्रार्थना मत करो। एक मजबूत व्यक्ति होने के लिए प्रार्थना करो। तुम पाओगे कि वास्तव में मजबूत हो और असंभव को संभव कर सकते हो।

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