मुख्यपृष्ठखबरेंकिस्सों का सबक:  सत्य का अन्वेषी

किस्सों का सबक:  सत्य का अन्वेषी

दीनदयाल मुरारका।  संत राबिया नसरी एक प्रसिद्ध साध्वी थीं। एक बार वह कुछ संतों के साथ आध्यात्मिक चर्चा में लीन थी। वहां बैठे एक संत का कहना था कि अध्यात्म के लिए जरूरी नहीं कि संगीत का सहारा ही लिया जाए? जबकि राबिया का मानना था कि ऊपर वाले को याद करने के लिए संगीत यह जरूरी न सही लेकिन यह एक बेहतर तरीका है। इससे उस सर्वशक्तिमान से आत्मिक तौर पर जुड़ने में सहूलियत होती है।
असल में संगीत हमें एकाग्रता देता है। जो ईश्वरोपासना के लिए आवश्यक तत्व है। कुछ ही देर में वहां हसन बसरी नाम के एक संत आ पहुंचे। इस बार हसन बसरी को न जाने क्या सूझी कि उन्होंने दरिया पर एक मुसल्ला बिछाया और राबिया से कहा, आओ यहां नमाज प़ढ़ें। यहां नमाज में किसी तरह की बाधा नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा, बहन राबिया, क्यों न हम झील के पानी पर बैठकर खुदा की बात करें। ऐसा कहा जाता है कि हसन बसरी पानी पर आराम से चल सकते थे। दरअसल, हसन को पानी पर चलने की सिद्धि प्राप्त हुई थी और इसी का प्रदर्शन करने के लिए वे उतावले थे। राबिया नसरी उनके इशारे को समझ गई और बोली, हसन भैया, हम खुदा का जिक्र आसमान में उड़ते हुए करें, तो वैâसा रहेगा? राबिया नसरी को आकाश में उड़ने का कमाल हासिल था। राबिया ने हवा में मुसल्ला बिछाकर कर कहां, आओ यहां नमाज पढ़े। हसन का मुसल्ला पानी पर तैर रहा था और राबिया का हवा में। यह देखकर हसन को कुछ छोटेपन का एहसास होने लगा। हसन को समझ में आ गया कि राबिया उन पर कटाक्ष कर रही है। अपनी पोल खुलती देखकर वह खीझ कर रह गए।
फिर राबिया ने हसन बसरी से कहा, भैया जो काम तुम कर सकते हो वह तो एक छोटी सी मछली भी कर सकती है और जो काम मैं कर सकती हूं उसे एक मामूली मक्खी भी कर लेती है। लेकिन सत्य इस करिश्में बाजी से कोसों दूर है। उसे तो विनम्र होकर खोजना पड़ता है। जो नम्र है, वही सत्य का सच्चा अन्वेषी है। अत: चमत्कार से बड़ी चीज कोई है, तो वह विनम्रता है। हमें अपनी ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उसका व्यापक उपयोग जनता के हित में करना चाहिए।

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