मुख्यपृष्ठराजनीतिगद्दारों के कहने पर ही कोश्यारी ने मविआ की सूची लौटाई!

गद्दारों के कहने पर ही कोश्यारी ने मविआ की सूची लौटाई!

न्यायालय को दिए प्रतिज्ञा पत्र में सरकार की स्वीकारोक्ति

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य सरकार ने सोमवार को उच्च न्यायालय में स्वीकार किया कि विधान परिषद में १२ विधायकों की नियुक्ति के लिए महाविकास आघाड़ी सरकार ने जिन नामों की सूची तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भेजी थी, उसे राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद ‘गद्दारों’ के कहने पर राज्यपाल ने वापस भेज दी थी। अदालत ने शिंदे सरकार की इस स्वीकारोक्ति को गंभीरता से लिया और याचिकाकर्ता शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कोल्हापुर शहरप्रमुख सुनील मोदी को सरकार के हलफनामे पर पुनर्याचिका दाखिल करने के लिए समय दिया। अगली सुनवाई २० सितंबर को होगी।
विधान परिषद में १२ विधायकों की नियुक्ति तीन साल से रुकी हुई है। महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा भेजी गई नामों की सूची को तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। फिर शिंदे सरकार के अनुरोध पर राज्यपाल की ओर से सूची वापस भेज दी गई। राज्यपाल की यह भूमिका कानूनी रूप से उचित नहीं है, इस पर आपत्ति जताते हुए सुनील मोदी ने हाई कोर्ट में नई जनहित याचिका दायर की है। याचिका पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
इस मौके पर सरकारी वकील मनीष पाबले ने शपथपत्र कोर्ट में पेश किया। राज्य के उपसचिव दिलीप देशपांडे ने हलफनामे के जरिए उस याचिका का विरोध किया है। हालांकि, हलफनामे में स्वीकार किया गया है कि दो साल पहले महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा सिफारिश नामों की सूची नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आदेश पर राज्यपाल कोश्यारी ने वापस भेज दी थी। हालांकि, राज्यपाल ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि उन्होंने दो साल में महाविकास आघाड़ी सरकार की सूची पर पैâसला क्यों नहीं लिया। सरकार की ओर से यह हलफनामा दाखिल किए जाने के बाद पीठ ने याचिकाकर्ता मोदी को जवाब जोड़ने के लिए वक्त दिया है।

हलफनामा में क्या कहा है?
१० अगस्त २०२२ को कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार ईडी सरकार के मुख्यमंत्री ने २३ अगस्त २०२२ को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पत्र लिखा था।
विधान परिषद के १२ विधायकों की नियुक्ति के लिए नई सिफारिशें करने के लिए पिछली महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा सिफारिश नामों की सूची वापस भेजें, ऐसा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्यपाल कोश्यारी से कहा।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा ऐसा पत्र भेजने के बाद राज्यपाल कोश्यारी ने ३० अगस्त २०२२ को महाविकास आघाड़ी सरकार के समय सिफारिश किए गए नामों की सूची सरकार को वापस भेज दी। नियुक्तियां होने से पहले अर्थात राज्यपाल द्वारा नाम स्वीकार किए जाने से पहले मुख्यमंत्री या मंत्रिमंडल सिफारिश वापस ले सकते हैं, ऐसा दावा सरकार ने प्रतिज्ञापत्र में किया है।
कोर्ट के सवालों का नहीं है जवाब
महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा सिफारिश नामों की सूची पर राज्यपाल ने निर्धारित समय में निर्णय क्यों नहीं लिया? शिंदे सरकार ने सत्ता में आने के बाद महाविकास आघाड़ी सरकार के द्वारा दी गई सूची को वापस किस आधार पर मंगवाया? ऐसे प्रश्नों के जवाब कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मांगे थे, जिस पर सरकार के पास कोई जवाब नहीं था।

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