मुख्यपृष्ठनए समाचारघोसी उपचुनाव: मूल भाजपाइयों ने बनाई दारा से दूरी

घोसी उपचुनाव: मूल भाजपाइयों ने बनाई दारा से दूरी

शिवपाल गरजे: यह उपचुनाव नहीं, भ्रष्टाचार बनाम जनता की लड़ाई है

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

घोसी विधानसभा उपचुनाव जोर पकड़ लिया है। दोनों ओर से शब्द बाणों की बौंछार होने लगी है। समाजवादी पार्टी के सबसे तगड़े चुनावी रणनीतिकार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने मोर्चा संभाल लिया है। बताते हैं कि उनको लेकर भाजपाइयों में खौफ रहता है। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए मैनपुरी लोकसभा के उपचुनाव में शिवपाल यादव ही संभाले थे। इस बार भी अखिलेश यादव ने यहां पर शिवपाल यादव को उतार दिया है। विधानसभा के अंदर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों या कोई अन्य भाजपाई सब शिवपाल से नहीं टकराते। इसीलिए 5 सितंबर को होने वाला घोसी विधानसभा के उपचुनाव में भी शिवपाल यादव ने मऊ में डेरा डाल दिया है। अहंकार में डूबे भाजपाई आपस में ही एकमत नहीं हो पा रहे हैं। संसाधनों पर कब्जा और बड़े नेताओं की खातिरदारी ने स्थानीय भाजपा को तबाह कर दिया है। मूल भाजपाई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग दारा सिंह चैहान से पूरी तरीके से जुड़ नहीं पा रहे हैं। ऐसे में भाजपा के सामने दोहरा धर्मसंकट है। यदि भाजपा जीतती है तो उसका सर्वाधिक श्रेय दारा सिंह चौहान को मिलेगा। यदि भाजपा हारती है तो प्रदेश अध्यक्ष भिपेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ेंगी। प्रदेश अध्यक्ष बनते ही भूपेंद्र सिंह अपने गृह क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खतौली विधानसभा उपचुनाव में हार से रू-ब-रू हुए थे। कार्यकाल का आरंभ था इसलिए उसकी बहुत चर्चा नहीं हुई, लेकिन घोसी में घुसे (हारे) तो सबसे ज्यादा उन्हें ही मंहगा पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभी तक घोसी नहीं गए हैं। इसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चा है।
दूसरी ओर शिवपाल यादव घूम-घूम कर दहाड़ रहे हैं। उन्होंने घोसी पहुंचते ही आक्रामक प्रहार शुरू कर दिया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अतुल कुमार अनजान के बड़गांव स्थिति आवास पर एक बैठक में शिवपाल यादव ने कहा कि यह लड़ाई गलत या सही की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार बनाम जनता की लड़ाई है। इस बार जनता भ्रष्टाचार को लेकर माकूल जवाब देगी। इसकी शुरुआत मऊ से हो गयी है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा अब तक की सरकारों में सबसे भ्रष्ट सरकार है। आगामी लोकसभा के चुनाव में इंडिया गठबंधन के बल पर चुनाव जीतेंगे। उन्होंने सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पर भी निशाना साधा। कहा कि उनकी कथनी एवं करनी में काफी अंतर है। वे अपनी बातों पर अमल नहीं करते। इसलिए उनकी बातों को कोई वजूद नहीं है। वह बोलते समय सामान्य मर्यादा का भी ध्यान नहीं रखते।

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