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देर से ही सही बर्फबारी ने फिर से गुलमर्ग और पहलगाम को धरती का स्वर्ग बना दिया

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

कश्मीर में बर्फबारी के सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि बर्फ कश्मीर को वंडरलैंड बना देती है और पर्यटकों के लिए धरती का स्वर्ग। पर्यटन पर ही जीवित कश्मीरियों की मजबूरी है कि बर्फबारी से होने वाली परेशानियों के बावजूद वे बर्फ का स्वागत करते हैं।
यह सच हे कि लंबे समय तक शुष्क रहने के बाद गुलमर्ग का बर्फ से ढका परिदृश्य एक शीतकालीन वंडरलैंड में बदल गया है, जो इस प्रसिद्ध स्की रिजार्ट में बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है और पर्यटन क्षेत्र को एक नया जीवन दे रहा है। गुलमर्ग, जो अपने मनमोहक परिदृश्यों और शीर्ष स्तरीय स्कीइंग ढलानों के लिए प्रसिद्ध है, ने 11 फरवरी तक असामान्य रूप से लंबे समय तक शुष्क मौसम का सामना किया था। देरी से हुई बर्फबारी, जिसने 11 फरवरी के बाद सुरम्य शहर को ढक दिया, ने न केवल गुलमर्ग को एक शीतकालीन वंडरलैंड में बदल दिया है, बल्कि अपने पर्यटन उद्योग को भी पुनर्जीवित किया है।
बहुप्रतीक्षित बर्फबारी, खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के चौथे संस्करण के साथ, एक उत्प्रेरक के रूप में काम करती है, जो पर्यटकों और स्कीयर को गुलमर्ग के शीतकालीन वंडरलैंड में आनंद लेने के लिए आकर्षित करती है। बर्फबारी के कुछ ही दिनों के भीतर इस क्षेत्र में पर्यटकों की आमद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। 12 से 17 फरवरी तक गुलमर्ग में कुल 19,532 पर्यटक आए, जो पिछले सप्ताहों की तुलना में काफी वृद्धि का संकेत है। इन आगंतुकों में से 15,086 घरेलू पर्यटक थे, जो गुलमर्ग के बर्फ से ढके इलाके की खोज में स्थानीय यात्रियों के बीच मजबूत रुचि को रेखांकित करता है। इसके अतिरिक्त इस अवधि के दौरान 4,290 स्थानीय लोगों और 156 विदेशियों ने भी अपनी उपस्थिति से इस क्षेत्र की शोभा बढ़ाई, जिससे गुलमर्ग का आकर्षण एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आकर्षण केंद्र के रूप में उजागर हुआ।
गुलमर्ग और पहलगाम में अब चारोें ओर बर्फ की सफेद की चादर है। कहीं बर्फ से अठखेलियां करते मेहंदी लगे हाथ तो कहीं स्लेज पर बैठ दूसरे की ताकत को आजमाने की कोशिश। बच्चों के लिए बर्फ का मानव बनाना तो जैसे सैंकड़ों का काम हो गया हो। बर्फ का पुतला बनाते बनाते रूई के फाहों के समान लगने वाले बर्फ के गोले एक दूसरे पर फेंककर फिर प्यार जताने की प्रक्रिया में डूबे नवविवाहित जोड़े, भयानक सर्दी, फिर भी सभी के मुंह से बस यही निकलता है कि ‘जमीं पर अगर कहीं जन्नत है तो यहीं है, यहीं है।’
कश्मीर में बर्फबारी कोई पहली बार नहीं हुई है। बर्फीले सुनामी के दौर से भी यह गुजर चुकी है, मगर शांति की बयार के बीच होने वाली बर्फबारी ने एक बार फिर कश्मीर को धरती का स्वर्ग बना दिया है। कुछ साल पहले तो यह धरती का नर्क बन गया था, इसी बर्फबारी के कारण। वैसे आतंकवाद के कारण आज भी यह उन लोगों के लिए नर्क ही है, जिनके सगे-संबंधी आए दिन आतंकवादियों की गोलियों का शिकार होते रहते हैं। धारा 370 हटाने और कोरोना पाबंदियों के चलते कई वर्षों के बाद कश्मीर में आई बहार कश्मीरियों को खुशी जरूर दे रही है। आने वालों का सिलसिला थमा नहीं है। अनवरत रूप से जारी आने वालों के लिए आज भी सैर-सपाटे का प्रथम गंतव्य कश्मीर ही है।
ऐसी परिस्थिति के बावजूद उन सभी के लिए कश्मीर फिर भी धरती का स्वर्ग है। सफेद चादर में लिपटा हुआ गुलमर्ग और पहलगाम, उन्हें किसी फिल्मी सपने के पूरा होने से कम नहीं लगता। गुलमर्ग में 4 से 5 फुट बर्फ ने तो कई जगह पहाड़ बनाए थे तो पहलगाम में इतनी ही बर्फ गिरी और अभी यह सिलसिला थम नहीं रहा था।

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