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मुंबई में खतरनाक हुआ लेप्टो! … दो संदिग्धों की मौत

बीमारी से मरनेवालों की संख्या हुई तीन
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा लगातार ढोल पीट रही है कि मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए तमाम तरह के उपायों को अमल में लाया गया है। इससे इन बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा रहा है। मनपा की तैयारियों के बावजूद मुंबई में लेप्टो खतरनाक बनता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, एक जून से १३ अगस्त के बीच लेप्टो के न केवल ६६१ मामले सामने आए हैं, बल्कि तीन संदिग्ध मरीजों ने दम भी तोड़ा है। इनमें से दो मरीजों की मौत हाल के दिनों में हुई है। ऐसे में मनपा द्वारा किए गए सभी दावे खोखले साबित होते दिखाई दे रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई के परेल स्थित केईएम अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों मरीजों की मौत हो गई। अस्पताल के मेडिसिन विभाग के अनुसार, २१ वर्षीय व्यक्ति ने १० अगस्त को दम तोड़ दिया, जबकि ५९ वर्षीय व्यक्ति की १८ अगस्त को मौत हो गई। दोनों लेप्टोस्पायरोसिस से पॉजिटिव थे और बहुत गंभीर हालत में गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराए गए थे। मुलुंड के एक निजी अस्पताल से २१ वर्षीय मृतक को बाईपैप सपोर्ट पर रेफर किया गया था। उसे चार दिन से ठंड के साथ बुखार और सांस फूलने की शिकायत थी। मरीज को तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। अस्पताल के एक डॉक्टर के मुताबिक, उसे कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) के चार सत्र दिए गए और वैसोप्रेसर्स (निम्न रक्तचाप वाले रोगियों को दिया जानेवाला) देना शुरू किया। इसके अलावा दोहरी वैसोप्रेसर सपोर्ट के साथ एंटीबायोटिक्स शुरू की गर्इं और सीपीआर फिर से दिया गया। इसके बावजूद वह बच नहीं सका। इसी तरह सायन कोलीवाड़ा निवासी ५९ वर्षीय दूसरे मरीज को इस्केमिक हृदय रोग और पुरानी शराब की लत का इतिहास था। उसे बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और सांस फूलने की समस्या के साथ लाया गया था। मरीज का निजी लैब से मलेरिया का टेस्ट किया गया था। हालांकि, उसे तीव्र गुर्दे की चोट और अन्य हृदय संबंधी समस्या के साथ-साथ लेप्टोस्पायरोसिस पॉजिटिव पाया गया। इसके चलते उसे वेंटिलेशन सपोर्ट पर रखने के बाद मलेरिया रोधी दवाएं शुरू कर दी गर्इं। हालांकि, इस बीच सेप्सिस विकसित होने के बाद मरीज की मृत्यु हो गई।

एक मरीज को पहले से ही था मलेरिया
दोनों मृतक दूसरी बीमारियों से भी पीड़ित थे और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, एक मरीज को पहले से ही मलेरिया था और बाद में उसमें लेप्टोस्पायरोसिस का पता चला। इसलिए मृत्यु लेखा समिति को यह निष्कर्ष निकालने से पहले की समीक्षा करने की आवश्यकता होगी।

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