मुख्यपृष्ठनए समाचारकिस्सों का सबक : नारी की पूजा

किस्सों का सबक : नारी की पूजा

डॉ. दीनदयाल मुरारका

जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। ऐसा हमारे धर्म ग्रंथों में कहा गया है। किंतु व्यवहार में हमने समाज में नारियों को कई प्रताड़नाएं झेलते हुए देखा है। मगर एक बार सचमुच ऐसी घटना हुई, जब हिंदी के महान संपादक महावीर प्रसाद द्विवेदी ने अपनी पत्नी की मूर्ति की स्थापना कर मंदिर बनवाया। हुआ यूं कि महावीर प्रसाद द्विवेदी की पत्नी ने परिवार द्वारा स्थापित महावीर (हनुमान जी) की मूर्ति के लिए एक चबूतरा बनवा दिया। जब द्विवेदी जी गांव दौलतपुर, रायबरेली आए तो पत्नी ने यूं ही चुटकी लेते हुए कहा, ‘लो मैंने तुम्हारा चबूतरा बनवा दिया।’ गांव के रिवाज के मुताबिक पत्नियां पति का नाम नहीं लेती थीं, इसलिए उन्होंने ऐसा महावीर का नाम न लेते हुए कहा।
दिवेदी जी की पत्नी न तो विदुषी थी, न ही रूपवती लेकिन अच्छी सहधर्मिणी अवश्य थी। इस कारण दिवेदी जी उनसे बहुत स्नेह करते थे। वह जितना स्नेह करते थे, उतना ही सम्मान भी करते थे। पत्नी की बात सुनकर उन्होंने भी चुटकी लेने के अंदाज में ही पत्नी से वादा किया, ‘चलो, तुमने मेरा चबूतरा बनवाया है, तो मैं भी तुम्हारा मंदिर बनवा दूंगा।’
खैर बात आई-गई हो गई और १९१२ में उनकी पत्नी की अचानक गंगा में डूब जाने से मृत्यु हो गई। पत्नी की मृत्यु के बाद द्विवेदी जी को पत्नी को दिया हुआ अपना वो वचन याद हो आया। उन्होंने अपने घर के आंगन में स्थित मंदिर में लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियों के बीच अपनी पत्नी की संगमरमर की प्रतिमा स्थापित कर अपना वचन पूरा किया। आज वे इस दुनिया में नहीं है, विरोध करनेवाले भी नहीं हैं। परंतु उनका बनाया हुआ वह स्मृति मंदिर आज भी महावीर जी की अपनी पत्नी के प्रति श्रद्धा और सम्मान की याद दिलाता हुआ उनके गांव में मौजूद है।

अन्य समाचार