मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : दस जनपथ

किस्सों का सबक : दस जनपथ

डॉ. दीनदयाल मुरारका
एक समय की बात है, जब लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र अनिल ने बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होने के बाद दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। उन दिनों शास्त्री जी देश के प्रधानमंत्री थे। अनिल ने आवेदन करते समय पिता का नाम एल.बी.शास्त्री और घर का पता दस जनपथ लिखा था। सभी विद्यार्थियों के साथ उनका आवेदन फॉर्म भी इंटरव्यू के लिए समिति के पास भेजा गया। कुछ देर बाद मिस्टर रॉबर्ट बाहर आए और अनिल से बोले, ‘आप दस जनपद में वैâसे रहते हैं? वहां तो प्रधानमंत्री जी का आवास है।’ यह सुनकर अनिल ने नम्रता से कहा, ‘जी सर, मैं प्रधानमंत्री का पुत्र अनिल हूं।’ यह सुनकर मिस्टर रॉबर्ट तुरंत अनिल को अपने साथ अंदर ले गए। वहां उनको विशेष सम्मान दिया गया। इंटरव्यू देने के बाद अनिल बड़े प्रसन्न मन से घर पहुंचे।
शाम को जब लाल बहादुर शास्त्री घर लौटकर आए तो अनिल प्रसन्न होकर उनसे बोला, ‘बाबूजी आज कॉलेज में मेरे साथ दो बात हुई। पहले तो किसी को यह पता नहीं था कि मैं आपका पुत्र हूं। उस समय मेरे साथ सामान्य विद्यार्थियों की तरह व्यवहार किया गया। लेकिन घर का पता देखकर एक सदस्य को जब पता चला कि मैं प्रधानमंत्री का पुत्र हूं। तो उन्होंने मुझे विशेष सम्मान दिया।’ यह सुनकर शास्त्री जी बोले, ‘तुमने बहुत अच्छा किया कि आवेदन फॉर्म सामान्य विद्यार्थियों की तरह ही लिखकर भेजा और अपनी बारी का इंतजार किया। लेकिन दूसरी बात से मैं सहमत नहीं हूं।’ यह सुनकर अनिल शास्त्री ने पूछा, ‘ऐसा क्यों बाबू जी? शास्त्री जी बोले जब कॉलेज के स्टाफ को पता चला कि प्रधानमंत्री के पुत्र हो तो उन्होंने तुम्हें विशेष सम्मान दिया। सम्मान व्यक्ति को किसी पद प्रतिष्ठा से नहीं, सिर्फ अपनी योग्यता से ही प्राप्त होना चाहिए।’ लाल बहादुर शास्त्री ने अपने जीवन में हमेशा उच्च आदर्शों का पालन किया और यही उदाहरण उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में दिया।

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