मुख्यपृष्ठनए समाचारकिस्सों का सबक: सुधारने का अनोखा तरीका

किस्सों का सबक: सुधारने का अनोखा तरीका

डॉ. दीनदयाल मुरारका

प्रत्येक गुरु अपने शिष्यों को अपने तरीके से शिक्षा प्रदान करते हैं। ऐसे ही एक यहूदी संत सिम्शा बुनेन अनोखे ढंग से लोगों को शिक्षित करने के लिए विख्यात थे। उनके पड़ोस में एक दुराचारी व्यक्ति रहता था, जिसे देखकर संत ने सोचा इसे कुछ अलग तरीके से ही सुधारा जा सकता है।

खैर, संत ने उसके बारे में सारी जानकारी प्राप्त की और शतरंज के शौकीन उस व्यक्ति को एक दिन उन्होंने शतरंज खेलने के लिए आमंत्रित किया। संत देखना चाहते थे कि वह किस तरह खेल खेलता है। खेल के दौरान सिम्शा ने जानबूझकर गलत चाल चली। जब व्यक्ति उनके मोहरे मारने लगा तो ‘माफ कीजिए’ कहकर वह मोहरे वापस लेने लगे। उस व्यक्ति ने कोई आपत्ति नहीं की और चाल वापस लेने दी। थोड़ी देर बाद सिम्शा ने फिर से गलत चाल चली और माफी मांगते हुए अपनी चाल वापस लेनी चाही।

लेकिन इस बार वह व्यक्ति नाराज हो गया और बोला, ‘मैंने एक बार मोहरा वापस क्या लेने दिया आप तो बार-बार चाल वापस लेने को कहते हैं। मैं ऐसा नहीं करने दूंगा।’ तब सिम्शा ने हंसकर कहा, ‘भाई तुम खेल में मेरी दो गलत चालों को नजरअंदाज करने को राजी नहीं हो। लेकिन अपनी जिंदगी में गलत चालें चलकर चाहते हो कि ईश्वर उन्हें हमेशा नजरअंदाज करते रहें। लेकिन ध्यान रखो कि गलत चालों का अंजाम कभी अच्छा नहीं होता। जिस तरह मेरे द्वारा गलत चाल चलने पर मैं शतरंज में बुरी तरह हार सकता था, वैसे ही तुम भी जिंदगी के शतरंज में खराब चालें चलकर हारने वाले हो। इस बात को समझो कि यदि दुनिया में रहना है तो बुरे कर्मों का त्याग कर स्वंय को अच्छे कामों में लगाना होगा।’

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