मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : एनेस्थीसिया की खोज

किस्सों का सबक : एनेस्थीसिया की खोज

डॉ. दीनदयाल मुरारका

डॉक्टर सर जेम्स यंग सिंपसन को एक मरीज का ऑपरेशन करना था। मरीज चीर-फाड़ से डरकर बुरी तरह चिल्ला रहा था। तब तक बेहोश करने का ऐसा कोई तरीका नहीं मिला था, जिसके जरिए ऑपरेशन के दौरान मरीज को दर्द के अहसास से बचाया जा सके। उस मरीज की स्थिति को देखते हुए उन्होंने उसके हाथ-पैर बांध दिए। चिकित्सक सिंपसन ने शल्य चिकित्सा शुरू की लेकिन दर्द के डर से ही मरीज की मृत्यु हो गई। यह देखकर डॉक्टर सिंपसन बहुत दुखी हुए। उन्होंने इस पर सोचना शुरू किया कि ऐसा क्या तरीका हो सकता है, जिससे मरीज शल्य चिकित्सा के कष्ट से बच जाए। पहले उन्हें सम्मोहन क्रिया का ध्यान आया।
इसके बाद उन्होंने नए-नए प्रयोग करने शुरू किए। १८४६ में उन्हें पता चला कि अमेरिकी दंत चिकित्सक विलियम मार्टन ईथर का प्रयोग करते हैं। इससे मरीजों को दर्द का एहसास कम होता है। वह भी स्त्रियों के प्रसव के दौरान ईथर का प्रयोग करने लगे। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि ईथर प्रसव के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने और अधिक प्रभावी एनेस्थीसिया की खोज करनी शुरू की। वे दिन में प्रयोगशाला में शोध करके एनेस्थीसिया तैयार करते थे।
रात को अपने घर पर दो डॉक्टर मित्रों के साथ बैठकर उन द्रवों को सूंघते थे। ४ नवंबर, १८४७ की रात को उन्हें एक खास छोटी सी बोतल का ध्यान आया, जिसमें रखे द्रव्य से वे प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने उस द्रव्य को गिलास में डाला और अपने मित्रों के साथ सूंघा। अगले ही पल सब बेहोश हो गए। लेकिन जब होश आया तो सिंपसन की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने बेहद शक्तिशाली एनेस्थीसिया की खोज कर ली थी। यह क्लोरोफॉर्म था। जीवन में लगातार यदि हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कार्य करते रहें तो एक दिन सफलता हमें अवश्य मिलती है।

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