मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक: समस्या का समाधान

किस्सों का सबक: समस्या का समाधान

डॉ. दीनदयाल मुरारका

संत रमन्ना के आश्रम में अनेक लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास समाधान के लिए आते थे। एक दिन एक जिज्ञासु व्यक्ति आया और संत के पास शीघ्र पहुंचने के लिए उसने अपने जूते जल्दी से उतारने की कोशिश की। जूते आसानी से उतर नहीं रहे थे तो क्रोध में किसी तरह पैर पटक कर उसने उन्हें उतारा और तेजी से आश्रम के दरवाजे को धकेलता हुआ संत के पास पहुंच गया।
आते ही उसने संत से कहा, ‘बाबा, मैं आपसे अपनी समस्या का समाधान जानने आया हूं।’ संत बोले, ‘तुम्हारी समस्या का समाधान असंभव है।’ वह व्यक्ति आश्चर्य से बोला, ‘भला मेरी समस्या का समाधान क्यों नहीं हो सकता?’ संत ने कहा, ‘क्योंकि तुम ठीक से व्यवहार करना ही नहीं जानते। जो विनम्र नहीं हो सकता उसका काम भी सफल नहीं होता।’ व्यक्ति ने पूछा, ‘परंतु मेरे व्यवहार में क्या दोष है?’ संत बोले, ‘कदम-कदम पर तुम अकारण क्रोध में वस्तुओं का नुकसान करते हो। तुमने अभी-अभी जूते और दरवाजे पर क्रोध किया है। जाओ पहले उन वस्तुओं से माफी मांगो।’ वह व्यक्ति हैरानी से बोला, ‘मैं बेजान चीजों से माफी मांगू?’ संत बोले, ‘तुम बेजान वस्तु के साथ भी सही ढंग से व्यवहार नहीं कर सकते हो और चाहते हो कि ईश्वर तुम्हारे साथ उचित व्यवहार करें। यदि तुमने इन वस्तुओं को वास्तव में बेजान समझा होता, तो तुम इन पर क्रोध ही नहीं करते। जीवन में कई बार विनम्रता से सारी समस्याओं के समाधान अपने आप हो जाते हैं।’
वह व्यक्ति संत का आशय समझ गया। उसने उन वस्तुओं के साथ-साथ संत से भी माफी मांगी और आगे से हर किसी के साथ विनम्रता से पेश आने का वचन दिया।

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