मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : अच्छे कार्य का श्रेय

किस्सों का सबक : अच्छे कार्य का श्रेय

डॉ. दीनदयाल मुरारका

संत गुरु नानक घूमते-घूमते किसी गांव में जा रहे थे। वहां पर उनका प्रवचन रखा गया था। रास्ते में एक किसान अपने धान के खेत के पास प्रसन्न चित्त बैठा था। गुरु नानक ने उससे कहा, ‘भगवान की कृपा से इस बार आपकी अच्छी फसल हुई है।’
किसान बोला, ‘इसमें भगवान की कृपा कहां से आ गई? यह तो मेरी मेहनत और सूझबूझ का फल है। मैंने कड़ी मेहनत करके, बारिश में भीग कर, खेतों की जुताई की। कुदाल से खोद- खोद कर खेतों में खुदाई की, समय पर खाद और पानी दिया तब जाकर अच्छी पैदावार हुई है। यदि मैं मेहनत नहीं करता, तो फसल अच्छी वैâसे होती?’ गुरु नानक ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप आगे बढ़ गए। कई साल बाद वो फिर उसी गांव में प्रवचन करने आए। इस बार वही किसान अपने खेत के पास मुंह लटकाए बैठा था। किसान को उदास देखकर गुरु नानक ने पूछा, ‘भैया इतना उदास क्यों हो?’ किसान ने कहा, ‘क्या बताऊं सूखे ने मेरी सारी मेहनत, सारे खर्चे पर पानी फेर दिया। भगवान ने मुझे तबाह कर दिया।’
गुरु नानक ने कहा, ‘भैया यह सब भगवान की माया है। वो कभी देता है तो कभी ले लेता है।’ इस पर किसान बोला, ‘आप क्यों जले पर नमक छिड़क रहे हैं।’ गुरु नानक ने जवाब दिया, ‘आपको याद होगा कि जब मैं पिछली बार आया था। तो आपकी अच्छी फसल देखकर मैंने कहा था, यह भगवान की कृपा है। उस समय आपने कहा था कि इसमें भगवान की कृपा कहां से आ गई? यह तो मेरी मेहनत का फल है। अब आप कह रहे हैं कि भगवान ने तबाह कर दिया। कोई काम अच्छा हो गया तो आप लोग उसका सारा श्रेय अपने आपको, अपनी मेहनत को देते हो। और कोई काम बिगड़ गया या बुरा हो गया तो, उन सब कार्यों का दोष आप भगवान पर डाल देते हो। यह भी तो उचित नहीं है। जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए के लिए भगवान की कृपा और अपना परिश्रम दोनों साथ होना चाहिए।’

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