मुख्यपृष्ठनए समाचारकिस्सों का सबक : निडरता

किस्सों का सबक : निडरता

डॉ. दीनदयाल मुरारका

एक बगीचे में कुछ लड़के आंख-मिचौली का खेल, खेल रहे थे। एक लड़का वहां आम के पेड़ पर चढ़कर घने पत्तों में छिप गया। बाग के माली को चिंता हुई कि बालक कहीं पेड़ से आम न तोड़ लें और उस लड़के को देखकर दूसरे बच्चे भी पेड़ पर चढ़ गए तो सब कुछ बर्बाद कर देंगे। अत: बच्चों को डराने के लिए उसने कहा, बच्चों इस पेड़ के पास न जाओ क्योंकि वहां एक ब्रह्मराक्षस रहता है, जो बच्चों को कच्चा खा जाता है। माली की बात सुनकर नरेंद्र नामक एक बालक ने पूछा, ब्रह्मराक्षस कैसा होता है? माली ने उत्तर दिया, किसी व्यक्ति की असामयिक मृत्यु के कारण वह राक्षस का रूप धारण कर लेता है। दिखने में वह बहुत ही भयानक होता है। इस बात से डरकर सब बच्चे भाग गए, परंतु नरेंद्र वहीं बैठा रहा। उसने माली से पूछा, क्या उसने ब्रह्मराक्षस को कभी अपनी आंखों से देखा है? नहीं, परंतु मैंने सुन रखा है, माली ने जवाब दिया। नरेंद्र ने फिर प्रश्न किया, वह व्यक्ति कौन था और वह कैसे मरा? जो अब ब्रह्मराक्षस बनकर बच्चों को तंग कर रहा है। क्या वह पेड़ के फल भी खा जाता है?
माली कुछ सकपकाकर बोला, तुम्हारी बात का उत्तर केवल भगवान ही दे सकता है या फिर स्वयं ब्रह्मराक्षस। यह कहकर वह अपनी कुटिया में चला गया। जब नरेंद्र रात में घर नहीं पहुंचा, तो उसके परिवार वालों को चिंता हुई। उन्होंने दूसरे बच्चों से नरेंद्र के बारे में पूछा। तब माता-पिता बगीचे की ओर गए और आवाज लगाई, नरेंद्र, कहां हो तुम? आवाज आई, मैं इस पेड़ पर हूं। तुम अंधेरी रात में इस पेड़ पर क्या कर रहे हो? नरेंद्र बोला, मैं ब्रह्मराक्षस का इंतजार कर रहा हूं। मैं उसे देखना चाहता हूं। मैं जानना चाहता हूं कि वह मनुष्य को क्यों सताता और क्यों मारता है? बचपन का वह जिज्ञासु बालक आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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