मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : नायिका की आत्महत्या

किस्सों का सबक : नायिका की आत्महत्या

डॉ. दीनदयाल मुरारका
प्रसिद्ध लेखक टॉलस्टॉय जब भी किसी कहानी या उपन्यास का सृजन कर रहे होते वे पात्रों के साथ अपना मानसिक तारतम्य स्थापित कर लेते थे। वे पात्रों के चरित्र में डूब जाते और उन्हें बाहरी दुनिया का कोई ध्यान नहीं रहता। अक्सर वे पूरी तरह कहानी के पात्रों में खो जाते और उन्हें खुद जीते थे।
ऐसे ही एक समय वे मस्कवा सेतु के पास किसी पुलिस अफसर से टकरा गए। अफसर ने यूं ही पुलिसिया अंदाज में सवाल दागा, क्या तूमने किसी नीली आंखों वाली खूबसूरत सी लड़की को पुल पर से गुजरते देखा है? महान लेखक ने आत्मलीन होकर कहा- जी हुजूर, अभी-अभी अन्ना योपकीना नामक एक सुंदर सी लड़की ने मस्क्वा नदी में छलांग लगाई है। उसकी आंखें नीली-नीली सागर सी गहरी, संवेदनशील और उसके बाल सुनहरे, नहीं काले थे।
थानेदार उन पर दहाड़ा, और तूने उसे रोका क्यों नहीं? बदमाश, चलो थाने चलना पड़ेगा। थाने पर जब पुलिस कप्तान ने टॉलस्टॉय को देखा तो वे सकते में आ गए। उसने उन्हें उठकर सलाम ठोका और कहा, सर कुछ काम था तो मुझे बुलवा लिया होता। खुद आने की तकलीफ क्यों की? टॉलस्टॉय हंस पड़े और बोले एक कहानी खत्म करके घूमने निकला था। कहानी की नायिका अन्ना योपकीना ने प्रेम में निराश होकर आत्महत्या कर ली। जब इंस्पेक्टर साहब ने मुझे सवाल किया, तो मैं अपनी नायिका अन्ना के खयाल में खोया हुआ था। कितनी प्यारी लड़की थी अन्ना बिचारी। तब उस पुलिस इंस्पेक्टर का चेहरा देखने लायक था। उसने टालस्टाय से अपनी गलती की माफी मांगी।

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