मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : आंखों का तेज

किस्सों का सबक : आंखों का तेज

डॉ. दीनदयाल मुरारका

एक समय की बात है एक कुख्यात डाकू फैंक्विल अचानक जज जैक्शन के कक्ष में घुस गया। डाकू को देखकर किसी पुलिस वाले की हिम्मत नहीं हुई कि उसे अंदर जाने से रोके। लोगों पर उसका कुछ इस कदर आतंक था कि लोग उसके नाम से थर-थर कांपते थे। आस-पास के लोग उसे देख रास्ता छोड़ छुप जाते थे। उस दिन कचहरी में महज डाकू फैंक्विल के घुसने की चर्चा हो रही थी कि सड़क पर चारों ओर सन्नाटा छा गया। आसपास की दुकानें बंद हो गईं। लोग अपने-अपने घरों में घुस गए।
जज जैक्शन ने डाकू को अपने कक्ष में जबरन घुसा देखा तो कड़ककर गार्ड से कहा, ‘पकड़ो उसे, कहीं भाग न जाए। उसे तुरंत गिरफ्तार करो।’ लेकिन किसी की हिम्मत न हुई उसे पकड़ने की। यह देखकर जज खुद कुर्सी से उठे और डाकू के पास जा पहुंचे। जज को देखकर डाकू ठिठक गया।
जज जैक्सन ने डाकू फैंक्विल को गिद्ध की तरह घूरते हुए देखा। जज का देखना था कि डाकू की नजरें नीचे झुक गईं। वह अंदर से सहम गया। पहली दफा उसने किसी की आंखों में ऐसा भयंकर तेज देखा था, जिसकी तरफ देखना मुश्किल हो। उसने चुपचाप अपने शस्त्र जमीन पर रख दिए। जब डाकू से पूछा गया कि ‘तुमने न तो जज पर वार किया, न ही उनकी आंखों की तरफ देखा, ऐसा क्यों?’ डाकू बोला, ‘जज की नजरों में ऐसा भयंकर तेज था कि मेरी हिम्मत ही नहीं हुई कि मैं उनकी तरफ देख पता। ऐसा लगा जैसे मेरे पैरों और हाथों में दम नहीं रह गया है।’ जब इस अद्भुत घटना की खबर फैली तो लोग जज के साहस की तारीफ करने लगे।

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