मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : कार्य में सफलता

किस्सों का सबक : कार्य में सफलता

डॉ. दीनदयाल मुरारका

एक समय मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन अपने एक सहायक के साथ ऑफिस में काम कर रहे थे। काम खत्म होने के बाद ढेर सारे इकट्ठा हुए कागजों को बांधने के लिए वे पेपर क्लिप ढूंढने लगे। कागज महत्वपूर्ण थे इसलिए उन्हें बांधना जरूरी था, वरना वे इधर-उधर हो जाते। लेकिन सहायक को कहीं भी पेपर क्लिप नजर नहीं आ रही थी। आइंस्टीन को एक खराब मुड़ी हुई क्लिप मिली। मगर उसे सीधा करना जरूरी था। तभी वह काम आ सकती थी। आइंस्टीन उसको सीधा करने में जुट गए। काफी देर हो गई। इसी बीच उनका सहायक बाजार से पेपर क्लिप का एक नया पैकेट खरीदकर ले आया। उसने नया पेपर क्लिप लेकर उन कागजों में लगा दिया और अपने काम में जुट गया।
एक-दो घंटे में अपना काम खत्म करने के बाद सहायक आइंस्टीन के पास आया तो यह देखकर वह दंग रह गया कि आइंस्टीन अभी भी उस खराब क्लिप को सीधा करने में लगे हुए थे। सहायक ने कहा, ‘सर मुझे पेपर को क्लिप में लगाए लगभग दो घंटे होनेवाले हैं और आप अभी तक इसे सीधा करने में लगे हुए हैं। अब इसकी कोई जरूरत नहीं। अब तो बहुत सारी नई क्लिप आ गई है।’ सहायक की बात सुनकर आइंस्टीन बोले, ‘तुम अपनी जगह ठीक हो। लेकिन मैं एक बार जब अपना कोई लक्ष्य निर्धारित कर लेता हूं, तो उससे हटना मुश्किल हो जाता है। मैं उसे पूरा करके ही छोड़ता हूं।’ यह सुनकर सहायक दंग रह गया। उसे आइंस्टीन की सफलता का राज समझ में आ गया। अपनी इसी एकाग्रता के कारण ही आइंस्टीन बहुत सारे शोध कर पाए।

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