मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : महान कहानीकार

किस्सों का सबक : महान कहानीकार

डॉ. दीनदयाल मुरारका

एक युवक ने समाज के दुख-दर्द की कथा, सीधी-सरल भाषा में, नई तकनीक के साथ लिखी। वह उसे अपने देश के प्रमुख पत्र ‘पेरी हेराल्ड’ में प्रकाशित करने के लिए संपादक के पास ले गया।
संपादक युवक को देखकर बोला- ‘तुम में कहानीकार का अनुभव और तुम्हारी सृजन कला में अपरिपक्वता है। मैं नहीं समझता कि ‘पेरी हेराल्ड’ जैसे पत्र के स्तर की कहानी तुम्हारे पास है।’ इतना सुनने के बाद भी युवक संपादक से बोला, ‘सर, मैं अपनी इस कहानी को आपके पास छोड़कर जा रहा हूं। उम्मीद है समय मिलने पर आप इसे एक नजर अवश्य देखेंगे और कुछ कमी पाए जाने पर मुझे बताएंगे, ताकि मैं उससे सुधार सकूं।’
कुछ दिन बाद वही संपादक उस युवक के दरवाजे पर खड़ा दस्तक दे रहा था। जब युवक ने दरवाजा खोला तो ‘पेरी हेराल्ड’ के संपादक को सामने पाकर वह दंग रह गया। युवक बोला, ‘सर, यदि आप सूचित करते तो मैं खुद आपके पास आ जाता।’ संपादक बोले, ‘आना तो मुझे ही था। फ्रांस के महान कहानीकार से मिलने।’ यह सुनकर युवक हैरान रह गया। उसे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ। संपादक कह रहे थे कि आपकी कहानी पढ़ने पर उसे उच्च कोटि का पाया गया। आपको महान कहानीकार की पदवी से विभूषित किया गया है। मैं आपको बधाई देने के लिए खुद आया हूं। उसके बाद संपादक ने एक हजार फ्रैंक के नोट्स युवक के हाथ में पुरस्कार स्वरूप दिए और कहा मैं आशा करता हूं कि भविष्य में भी आप ‘पेरी हेराल्ड’ के लिए अपनी रचनाएं भेजते रहेंगे। यही युवक बाद में महान कथाकार मोकासां बना। जीवन में यदि हम कोई भी काम पूर्ण समर्पण एवं ईमानदारी से करते हैं, तो सफलता निश्चित ही हमारे हाथ लगती है।

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